- 27 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों से कर रहे संपर्क
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर/जाखलौन। धौर्रा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव के लिए ग्रामीण बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए धौर्रा क्षेत्र के ग्रामीण आसपास की सभी 27 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों से संपर्क कर रहे हैं और आगामी पांच दिनों बाद से प्रतिदिन सभी ग्राम पंचायतों के सभी ग्राम प्रधानों के घर के सामने दो-दो घंटे का प्रदर्शन किया जाएगा।
धौर्रा रेलवे स्टेशन पर कोरोना काल से पहले तक झेलम, साबरमती, पठानकोट, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के साथ ही झांसी इटारसी पैसेंजर और बीना झांसी शटल का ठहराव होता था। लेकिन कोरोना काल केे दौरान इन ट्रेनों का यहां ठहराव बंद हो गया था। जिसके बाद स्थानीय धौर्रा व आसपास के क्षेत्र के लोगों ने इन ट्रेनों के ठहराव की मांग के लिए आंदोलन किए तो पठानकोट और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस का ठहराव तो हो गया, लेकिन बाकी ट्रेनों का ठहराव नहीं हो सका। जिसके चलते क्षेत्र के ग्रामीण व स्थानीय दलों के लोग ट्रेनों के ठहराव के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं, रेल अधिकारियों से लेकर रेल मंत्री, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेज चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी सुनवाई नहीं हुई, जिससे अब धौर्रा क्षेत्र के लोग ट्रेनों के ठहराव के लिए बड़े आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। इसकेे लिए धौर्रा मेें भागवत आचार्य श्रीकांत नायक के नेतृत्व में क्षेत्रवासी आंदोलन के लिए क्षेत्र की सभी 27 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों से संपर्क कर रहे हैं और क्षेत्र के लोग पांच दिन बाद से हर रोज ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों के दरवाजे के बाहर बैठकर प्रदर्शन करेंगे और इसकी शुरुआत ग्राम धौर्रा के ग्राम प्रधान से ही करेंगे। इसके बाद सभी ग्राम प्रधानों को एकत्रित करके सभी ग्राम के लोगों के साथ मिलकर ट्रेनों के ठहराव का बड़ा आंदोलन करेंगे, ताकि ट्रेनों का ठहराव हो सके।
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कैप्सन-श्रीकांत नायक।
धौर्रा में ट्रेनों के ठहराव नहीं होने से यहां के स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों, व्यापारियों सभी वर्ग के लोगों को काफी समस्या हो रही है। इसके लिए आंदोलन की रूपरेखा बनाई जा रही है। सभी 27 ग्राम पंचायतों के प्रधानों से संपर्क किया जा रहा है। आगे प्रधानों के घर के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा और उनका समर्थन लिया जाएगा।
-श्रीकांत नायक, भागवताचार्य
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कैप्सन-नासिर खान।
धौर्रा में ट्रेनों के ठहराव के लिए आंदोलन की राह पर जाना पड़ा तो उसके लिए तैयार हैं, लेकिन ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से क्षेत्रवासी एवं आसपास के सभी लोग प्रभावित हो रहे हैं। इसके लिए सभी ग्राम प्रधान और क्षेत्रवासी साथ मिलकर ट्रेनों के ठहराव को क्षेत्र के बाहर भी आंदोलन काे तैयार हैं।
-नासिर खान, ग्राम प्रधान, पिपरई।
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कैप्सन-ओम प्रकाश यादव।
क्षेत्र के लोगों की समस्या के निदान और क्षेत्र के विकास के लिए ट्रेनों का ठहराव जरूरी है। इसके लिए किए जाने वाले आंदोलन में पूरा साथ दिया जाएगा। यह जनहित का मुद्दा है, इसमें रेलवे के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी सहयोग करना चाहिए।
-ओमप्रकाश यादव, पूर्व ग्राम प्रधान, धौर्रा, भारौन