झांसी। शहर ही नहीं अब गांवों के बच्चे भी मोटापा से जूझने लगे हैं। चिकित्सकों के अनुसार पिछले पांच-छह सालों में यह बदलाव देखने को मिला है। कम उम्र में मोटापा का शिकार बच्चों के परिजन उनकी सेहत को लेकर काफी चिंतित रहते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जागरूकता लाकर इस पर काबू किया जा सकता है।
बच्चों में मोटापा एक गंभीर समस्या बनाता जा रहा है। यह 21वीं सदी की स्वास्थ्य चुनौतियों में एक है। भारत पोषण की दोहरी मार झेल रहा है, जहां एक ओर कुपोषण से लड़ाई जारी है। वहीं, दूसरी तरफ मोटापा से ग्रसित बच्चे बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार 14.4 मिलियन बच्चे भारत में मोटापा से ग्रसित हैं और चीन के बाद भारत इस बीमारी में दूसरे स्थान पर है। ग्रामीण बच्चों की अपेक्षा मोटापा ज्यादातर शहरों में देखा जाता है लेकिन पिछले पांच-छह सालों में गांव की बदली जीवनशैली और शहरीकरण के कारण ये गांव के बच्चों को भी प्रभावित कर रहा है।
केस-1
12 साल का बच्चा 75 किलो का
शहर क्षेत्र में रहने वाला 12 साल का बच्चा 75 किलो का है। परिजन उसके वजन को लेकर काफी चिंतित हैं। बताया गया कि बच्चे का दस किलो वजन तो लॉकडाउन में ही बढ़ गया। डॉक्टर ने परिजनों को वजन करने के संबंध में अहम टिप्स दिए हैं।
केस-2
10 वर्षीय बच्चा हुआ 70 किलो का
ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले दस साल के बच्चे का वजन भी 70 किलो का हो गया है। बताया गया कि वह दिनभर फास्ट-फूड, चॉकलेट आदि खाता रहता है और बैठे-बैठे मोबाइल पर गेम खेलता रहता है। डॉक्टर ने खेलकूद, खानपान में बदलाव की सलाह दी है।
बच्चों के विकास की दर अलग-अलग होती है। ऐसे में माता-पिता समय से समझ नहीं पाते हैं कि बच्चा मोटापे से ग्रसित हो रहा है। लंबाई और उम्र के अनुसार बच्चे की सामान्य से अधिक वजन होने की स्थिति को मोटापा कहते हैं, जिसे बीएमआई चार्ट के अनुसार मापा जाता है। जनमानस में जागरूकता लाकर ही इस समस्या पर काबू किया जा सकता है। पांच-छह साल पहले तक तो मोटापे से ग्रसित अधिकांश बच्चे शहर के ही आते थे मगर अब गांवों के कई बच्चे भी इससे ग्रस्त हो रहे हैं। - डॉ. आराधना कनकने, बाल रोग विशेषज्ञन, मेडिकल कॉलेज।
ये हैं कारण
- असंतुलित खानपान जैसे फास्टफूड, चीनी वाले पेय पदार्थ, चॉकलेट, मिठाई का सेवन।
- शारीरिक गतिविधि और खेलकूद में कमी।, टीवी, मोबाइल, इंटरनेट पर ज्यादा समय व्यतीत करना।
- बच्चों में बढ़ता मानसिक तनाव, नकारात्मक भावना भी ज्यादा खाने के कारण होता है।
- विभिन्न बीमारियां जैसे हार्मोन डिस्टर्ब होने से भी वजन बढ़ता है। अत: चिकित्सीय परामर्श जरूरी है।
मोटापा का दुष्प्रभाव
- गंभीर बीमारी जैसे डायबिटीज, अस्थमा, ह्रदय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।
- नींद न आना, स्लीप एप्निया सोते समय खर्राटे लेते-लेते सांस रुकना
- बच्चों का कद बढ़ना रुक जाना, थकान व शरीर में दर्द
- आत्मविश्वास में कमी, याददाश्त में कमी।
ये है बचाव
- नवजात शिशु को छह महीने तक मां का दूध देने से भविष्य में मोटापा की संभावना कम होती है। डब्बा बंद दूध का उपयोग न करें।
- घर में बना हुआ ताजा संतुलित भोजन करें। हर प्रकार व रंग की सब्जी, मौसमी फल, ड्राई फ्रूट्स, नट्स आदि का सेवन करें।
- फलों के रस की बजाए साबुन, फल लें, जिससे फाइबर पहुंचे।
- जंक फूड, फास्ट फूड, कोल्डड्रिंक, जूस, चॉकलेट आदि से परहेज करें।
- मोबाइल, टीवी, इंटरनेट का समय निर्धारित करें और खाना खाते समय इनका उपयोग न करें।
- पर्याप्त मात्रा में नींद लें, सोने व जागने का समय तय करें। अनिद्रा से हार्मोन पर असर होता है और वजन बढ़ता है।
- बच्चों को व्यायाम से ज्यादा शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।