भारतीय जनता पार्टी से राजनीति की शुरूआत करने वाले पूर्व मंत्री रतनलाल अहिरवार सपा - बसपा में होते हुए एक बार फिर भगवा झंडे के नीचे आगए हैं। सोमवार को उन्होंने लखनऊ में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। रतनलाल पांच बार बबीना विधानसभा से विधायक चुने जा चुके हैं।
किस्मत के धनी माने जाने वाले रतनलाल का राजनीतिक सफर हमेशा सुर्खियों में रहा है। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरूआत भाजपा से की थी। भाजपा ने वर्ष 1984 में उन्हें बबीना विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया था। हालांकि, इस चुनाव में पार्टी का जनाधार घटा और वोटों की संख्या घटकर 18,894 रह गई थी। इस चुनाव में बेनीबाई 43,894 वोट लेकर जीतने में सफल रहीं। मगर भाजपा ने दोबारा वर्ष 1989 में उन पर फिर भरोसा जताया। इस चुनाव में रतन लाल अहिरवार को रिकार्ड 65,447 वोट मिले थे। उन्होंने बेनीबाई को 24,501 मतों से हराया था। इस बीच चली राम मंदिर लहर ने बबीना को भी अपने रंग में डुबो दिया। इस दौरान रतनलाल ने जीत की हैट्रिक लगाई थी।
वर्ष1996 के चुनाव में बसपा के सतीश जतारिया ने बीजेपी से ही लड़े रतनलाल को हरा कर भाजपा का विजय रथ रोक दिया। इस चुनाव में बबीना विधानसभा की जनता का भाजपा से मोहभंग होते देख रतन लाल ने सपा का दामन थाम लिया। यह फैसला रतन लाल के लिए वर्ष 2002 के चुनाव में फायदेमंद साबित हुआ और वह चौथी बार विधायक बन गए। लेकिन समाजवादी पार्टी में तवज्जो न मिलने पर उन्होंने वर्ष 2007 से पहले बसपा का दामन थाम लिया। यह निर्णय भी उनके लिए भाग्यशाली साबित हुआ। वर्ष 2007 में उन्होंने बबीना विधानसभा में 62,771 वोट पाकर जीत हासिल की थी। शानदार जीत पर पार्टी प्रमुख सुश्री मायावती ने उन्हें प्रदेश सरकार में अंबेडकर ग्राम विकास राज्यमंत्री के पद से नवाजा। मगर सरकार का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही शिकायतों के चलते पार्टी प्रमुख ने उन्हें निष्कासित कर दिया। दो साल के निष्कासन के बाद उनकी पार्टी में वापसी तो हो गई, लेकिन वह पुराना सम्मान वापस नहीं पा सके। इन दिनों वह हाशिए पर चल रहे थे। आखिर सोमवार को उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
पार्टी की सेवा करने आया हूं: रतन लाल
पूर्व मंत्री रतन लाल अहिरवार ने कहा कि भाजपा ने ही मुझे नेता बनाया था। भाजपा से मिली जीत ने उन्हें वरिष्ठ बनाया और उसी का नतीजा है कि मैं मंत्री बन सका। जिस पार्टी ने उन्हें बनाया अब वह उसकी सेवा करने आए हैं। बबीना से चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि चूंकि अब यह सीट सामान्य हो चुकी है, इस कारण अब मैं किसी दूसरे का हक नहीं छीन सकता। अगर पार्टी सुरक्षित सीट से लड़ाती है तो लड़ने से इंकार भी नहीं करूंगा।