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Jhansi News: पीतांबरा पीठ पर बनेगा वैदिक पुस्तकालय एवं शोध केंद्र

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संवाद न्यूज एजेंसी
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झांसी। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर दतिया स्थित पीतांबरा पीठ परिसर में वैदिक पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की स्थापना की जाएगी। इस केंद्र में पीठ की स्थापना कराने और मां बगलामुखी व मां धूमावती की प्राण-प्रतिष्ठा कराने वाले पूज्यपाद स्वामी द्वारा लिखित हजारों पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण किया जाएगा। संभावना है कि इसका निर्माण कार्य इसी वर्ष पूर्ण हो जाएगा।

10 हजार वर्ग फीट भूमि उपलब्ध



पीतांबरा पीठ ट्रस्ट की अध्यक्ष वसुंधरा राजे सिंधिया ने शोध केंद्र के लिए पीठ परिसर में लगभग 10 हजार वर्ग फीट भूमि उपलब्ध कराई है। भवन का नक्शा पुणे स्थित महर्षि कर्वे इंस्टीट्यूट के आर्किटेक्चर विभागाध्यक्ष सौरभ मराठे ने तैयार किया है। मुंबई के उद्योगपति एवं मां के भक्त सुरेश सरिया निर्माण पर होने वाला व्यय वहन कर रहे हैं। पीठ से लंबे समय से जुड़े पुणे निवासी प्रमोद वर्मा की देखरेख में निर्माण होगा। उनके अनुसार, इस केंद्र को विश्वभर के सनातन अध्ययन से जुड़े विश्वविद्यालयों से ऑनलाइन जोड़ा जाएगा, ताकि देश-विदेश के विद्यार्थी एवं शोधार्थी डिजिटल माध्यम से अध्ययन कर सकें।
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पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन


केंद्र में पूज्यपाद स्वामी द्वारा लिखित लगभग 6700 पांडुलिपियों को सुरक्षित रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त विभिन्न विद्वानों द्वारा रचित करीब 10 हजार धार्मिक ग्रंथ भी संरक्षित किए जाएंगे। सभी ग्रंथों का डिजिटाइजेशन कर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे शोधार्थी घर बैठे अध्ययन कर सकें।

पाली और प्राकृत भाषा के दुर्लभ ग्रंथ



पीठ के प्रबंधक पंडित महेश दुबे ने बताया कि स्वामी जी ने वर्ष 1935 में मां बगलामुखी देवी की प्राण-प्रतिष्ठा तथा सन् 1978 में मां धूमावती की प्राण-प्रतिष्ठा कराई थी। कई ग्रंथ पाली और प्राकृत भाषा में लिखे गए हैं, जो शोधार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मुंबई निवासी सुरेश सरिया ने बताया कि स्वामी जी ने समाधि से पूर्व ऐसे शोध केंद्र की स्थापना की इच्छा व्यक्त की थी। वर्षों से इस विचार पर मंथन चल रहा था, जो अब साकार रूप ले रहा है।
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तीन मंजिला होगा भवन



पुणे के भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट के सहयोग से बनने वाला यह केंद्र पीठ परिसर के पूर्वी भाग में निर्मित होगा। आधारशिला पहले ही ट्रस्ट अध्यक्ष एवं अन्य ट्रस्टियों द्वारा रखी जा चुकी है। बरसात के दौरान जलभराव की स्थिति को देखते हुए भवन को लगभग ढाई मीटर ऊंचा बनाया जा रहा है। तीन मंजिला इस भवन के निर्माण पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह वैदिक पुस्तकालय एवं शोध केंद्र सनातन परंपरा, प्राचीन ग्रंथों और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण व प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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