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UP: अब लैपटॉप से भी चलाई जा सकेंगी ट्रेनें... सबसे पहले यहां होगा इस तकनीक का उपयोग; प्रभावित नहीं होगा संचालन

Thu, 14 Nov 2024 03:57 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

अब लैपटॉप से भी ट्रेनें संचालित की जा सकेंगी। हाई मैट्रिक्स का सबसे पहले झांसी में प्रयोग होगा। किसी भी परिस्थिति में संचालन प्रभावित नहीं होगा।
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भारतीय रेलवे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ट्रेनों का संचालन किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो इसके लिए भारतीय रेल में पहली बार हाई मैट्रिक्स तकनीक का इस्तेमाल झांसी में किया जा रहा है। वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन से लेकर यार्ड तक यह तकनीक स्थापित की जा रही है। इसका काम मार्च 2025 में पूरा कर लिया जाएगा। 
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इसके बाद अन्य मंडलों में भी यह तकनीक स्थापित की जाएगी। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाकर 160 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंचाने के लिए भारतीय रेल पटरी से लेकर सिग्नल तक में बदलाव कर रही है। इसी बदलाव के क्रम में रेलवे अब अपनी पुरानी कॉपर आधारित सिग्नल केबल को भी आधुनिक हाई मैट्रिक्स तकनीक से बदलने जा रहा है।

इसमें पूरी सिग्नलिंग प्रणाली ऑप्टिकल फाइबर केबल पर आधारित होगी। इसमें ट्रेनों के संचालन में इस्तेमाल होने वाले भारी भरकम उपकरण, सिग्नल केबिन और रेल संचालन के लिए स्थापित होने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर की भी आवश्यकता नहीं होगी।
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यदि केबल में फॉल्ट आता है या वह किसी दूसरे कारण से भी क्षतिग्रस्त होती है, तो भी ट्रेनों का संचालन प्रभावित नहीं होगा। इसके लिए झांसी स्टेशन से जुड़े यार्ड और मेन लाइन पर दोनों ओर पांच किलोमीटर के दायरे में टर्मिनल बनाए जा रहे हैं। 

इन टर्मिनल से आपात स्थिति में कंट्रोलर को केवल अपना लैपटॉप जोड़ने की आवश्यकता होगी, जिसके बाद ट्रेनों का आवागमन सुचारू हो जाएगा। परियोजना इकाई की ओर से 36 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित की जा रही तकनीक को झांसी स्टेशन और वार्ड में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर स्थापित किया जा रहा है। इसकी सफलता के बाद इसे पूरे भारतीय रेल में लागू कर दिया जाएगा।
 

ठप हो जाता था रेल संचालन
इस समय यदि केबल कहीं क्षतिग्रस्त होती है या जल जाती है, तो उस रेलमार्ग की सभी सिग्नल प्रणाली ठप हो जाती हैं। ऐसे में ट्रेनों का संचालन मैनुअल किया जाता है, जिससे ट्रेनें घंटों लेट भी होती हैं। साथ ही उन्हें स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक लाने में भी समस्या होती है। हाई मैट्रिक्स तकनीक से ट्रेनों का संचालन प्रभावित नहीं होगा।

 

इटारसी के मामले से लिया सबक
एक दशक पहले इटारसी स्टेशन के पास किसानों की ओर से खेत में लगाई गई आग के कारण यहां बिछाई गई सिग्नल केवल जल गई थी। इससे रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया था। इसी से सबक लेते हुए अब रेलवे ने आधुनिक तकनीक को अपनाया जा रहा है।

आरडीएसओ से सत्यापित है तकनीक
ट्रेनों की तकनीक पर काम करने वाली संस्था आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स अऑर्गनाइजेशन) ने हाई मैट्रिक्स तकनीक को परखने के बाद उसे मुफीद घोषित किया है। इसके बाद ही मंडल में इसकी स्थापना का कार्य शुरू हुआ।

 
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भारतीय रेल में पहली बार इस्तेमाल होने वाली हाई मैट्रिक्स तकनीक झांसी स्टेशन और यार्ड में स्थापित की जा रही है। इसका रेल संचालन में सीधा लाभ होगा। इससे किसी भी विषम परिस्थिति में ट्रेनों का संचालन सुरक्षा के साथ बहाल रखा जा सकेगा। अगले साल इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। -दीपक कुमार सिन्हा, मंडल रेल प्रबंधक, झांसी।
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