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UP: अमेरिका से ट्रेड डील पर बोले अखिलेश, ग्रासलैंड को बर्बाद करने के लिए विदेश से आएगा जानवरों का खाना

Mon, 09 Feb 2026 10:45 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

अखिलेश यादव ने कहा कि झांसी में ग्रासलैंड है। इसका काम जानवरों के लिए अच्छी किस्म की घास और चारा तैयार करना है। सरकार अब इस संस्थान को बर्बाद करने के लिए अमेरिका से घास और चारा मंगवा रही है। 
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अखिलेश यादव - फोटो : samajwadi party YT channel
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विस्तार
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अमेरिका से भारत की ट्रेड डील के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव के एक बयान से सियासत गरमा गई है। उनके चलाए सियासी तीर के केंद्र में झांसी का ग्रासलैंड संस्थान भी आ गया है। सपा प्रमुख ने सोमवार को मीडिया में बयान दिया कि अगर विदेश से जानवरों का खाना आएगा तो ग्रासलैंड का क्या होगा। वहीं संस्थान के आंकड़े बताते हैं कि दो साल में यहां ढाई गुना से ज्यादा बीज उत्पादन बढ़ गया है।
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अखिलेश यादव ने कहा कि झांसी में भारतीय चारा एवं चरागाह अनुसंधान संस्थान (आईजीएफआरआई) है। इसका काम जानवरों के लिए अच्छी किस्म की घास और चारा तैयार करना है। ताकि दुग्ध उत्पादन बढ़ सके और उसकी गुणवत्ता बेहतर हो। अमेरिका से ट्रेड डील हुई है। सरकार अब इस संस्थान को बर्बाद करने के लिए अमेरिका से घास और चारा मंगवा रही है। भाजपा सरकार ने अब तो पूरा बाजार ही विदेशियों के लिए खोल दिया है। अब जानवरों के खाने का सामान भी बाहर से आएगा। अगर ऐसा होगा तो झांसी में बने ग्रासलैंड का क्या होगा।


ग्रासलैंड कर चुका 16 कंपनियों से करार
वहीं अखिल भारतीय चारा अनुसंधान परियोजना समन्वयक डॉ. विजय यादव का कहना है झांसी में वर्ष 1962 में स्थापित हुआ आईजीएफआरआई अब तक 480 से अधिक चारा प्रजातियों का विकास 36 फसलों में कर चुका है। ग्रासलैंड वर्ष 2022-23 में चारा किस्मों का 600 क्विंटल प्रजनक बीज का उत्पादन करता था। 2024-25 में संस्थान ने 125 से अधिक प्रजातियों के 1600 क्विंटल प्रजनक बीजों का उत्पादन किया है। इसके अलावा संस्थान हर साल लगभग 1200 किसानों के खेतों पर नई तकनीकों का प्रदर्शन भी कराता है। गर्मियों में चारा की कमी को देखते हुए हाइब्रिड बाजरा की बहु कटाई किस्में विकसित की हैं। इसके अलावा बहुवर्षीय चारा फसलों की किस्में भी विकसित की हैं, जिन्हें एक बार लगाने पर चार से पांच साल तक हर वर्ष पांच-छह कटाई कर चारा प्राप्त किया जा सकता है। इसमें बाजरा नेपियर हाईब्रिड फसल देश भर में काफी लोकप्रिय है। इसकी 26 प्रजातियों का विकास हो चुका है। पिछले दो साल में 16 कंपनियों से ग्रासलैंड ने इन किस्मों का बीज पैदा करने के लिए करार भी किया है। इन्हें कम दरों पर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
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10 साल में 19 फीसदी कम हुई चारा की कमी की समस्या
देश में गर्मियों में अप्रैल, मई और जून में चारा की काफी कमी हो जाती थी। इसी के मद्देनजर संस्थान ने बाजरा की बहु कटाई किस्में विकसित की हैं। झांसी, ललितपुर, जालौन में भी ये लगाई जाने लगी हैं। फरवरी-मार्च में लगाने पर जून तक चारा मिलता रहता है। वहीं संस्थान के निदेशक डॉ. पंकज कौशल का कहना है कि भारत में 10 साल पहले हरा चारा की कमी 30 फीसदी थी, वो अब घटकर 11 प्रतिशत रह गई है। इसमें ग्रासलैंड का बड़ा योगदान है।
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