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Jhansi: बेमिसाल बेटियां... अंग्रेजों को कानून का पाठ पढ़ा रहीं झांसी की गजल खान

Fri, 12 Jul 2024 05:56 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

सार

गजल के पिता ने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी अपनी काबिलियत के दम पर अमेरिका में लॉ की पढ़ाई करेगी और वहां रहकर अंग्रेजों को कानूनी सहायता दिलाएगी।
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अमेरिका में गजल खान।  - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गर देखना है मेरी उड़ान को तो और ऊंचा कर दो इस आसमान को'''''''' यह शब्द झांसी के मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली गजल खान की सफलता को बयान करते हैं। झांसी से अपने मुस्तकबिल को संवारने का सफर शुरू करने वाली गजल सफलता के शिखर पर हैं। उनकी काबिलियत को अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ने स्कॉलरशिप से सराहा और वह कानून की पढ़ाई करने सात समंदर पार जा पहुंचीं। गजल अमेरिका में रहकर वहां के लोगों को कानूनी सहायता मुहैया करा रही हैं।

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बड़ागांव गेट निवासी राष्ट्रीय स्तर के एथलीट असद उल्लाह और शबाना खान की इकलौती बेटी गजल खान की सफलता की कहानी उन बेटियों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं, जो समाज और पैसे के अभाव के आगे अपने सपनों के पूरा होने की उम्मीद छोड़ देती हैं। गजल के पिता ने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी अपनी काबिलियत के दम पर अमेरिका में लॉ की पढ़ाई करेगी और वहां रहकर अंग्रेजों को कानूनी सहायता दिलाएगी। गजल बताती हैं कि उन्हें वकील बनने की प्रेरणा उनके दादा मोहसन उल्लाह खान से मिली है। लेकिन, पिता के पास इतना पैसा नहीं था कि वह उन्हें अमेरिका भेज सकें। बावजूद इसके उन्होंने अपने सपने को पूरा करने की कोशिश नहीं छोड़ी।

उन्होंने पुणे की सिंबायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री पूरी की और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी। लेकिन, इस दौरान अमेरिका जाने के अपने सपने और जुनून को बरकरार रखा। पूरी शिद्दत से की गई गज़ल की कोशिश साल 2022 में रंग लाई और उनकी काबिलियत को देखते हुए अमेरिका की पैन स्टेट यूनिवर्सिटी ने उन्हें एलएलएम की डिग्री के लिए सौ फीसदी स्कॉलरशिप देकर उनके सपने को पंख दे दिए। इसके बाद गज़ल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और सफलता की सीढ़ी चढ़ती गईं। यहां अमेरिका में उन्हें पढ़ाई के दौरान यूनिवर्सिटी ने पार्ट टाइम जॉब भी दे दी। आज गज़ल खान न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित लॉ फार्म में लीगल एडवाइजर के साथ सीएटल शहर की लॉ फार्म में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं। गजल के पिता कहते हैं कि रिश्तेदारों ने कई बार बेटी की शादी कर देने की सलाह दी लेकिन, अब उन्होंने यह निर्णय अपनी बेटी पर छोड़ दिया है।

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