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Jhansi News: दिमाग की अनियंत्रित तरंगों से पड़ता है दौरा

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न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद कनकने ने कहा- मिर्गी का रोग न संक्रामक होता है और न जादू-टोने का असर
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मिर्गी के दौरे की कोई खास एक-दो वजह नहीं है। न संक्रामक रोग है और न जादू-टोने का असर। ध्यान रखें मस्तिष्क में तरंगें अनियंत्रित होने से मिर्गी का दौरा पड़ता है। हां, जन्म के समय देर से रोने, सिर में चोट, लकवा, ट्यूमर, मस्तिष्क ज्वर, मस्तिष्क की टीवी आदि कारण बन सकता है। ये जानकारी मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कनकने ने दी।
डॉ. कनकने ने बताया कि मिर्गी के दौरे का समय से उपचार कराने से न सिर्फ रोगी को राहत मिलती है बल्कि इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उपचार में देरी से दौरे नियंत्रित करने में समय लगता है और जानलेवा भी हो जाता है। मरीज को समझना होगा कि मिर्गी के दौरे जादू-टोना या ऊपरी चक्कर से नहीं पड़ते हैं। मिर्गी के समय रोगी को कोई भी वस्तु सुंघाया नहीं जाना चाहिए। जबरन मुंह में पानी न डालें अन्यथा मौत हो सकती है।
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ऐसे पड़ते हैं मिर्गी के दौरे : मस्तिष्क की छोटी-छोटी लाखों कोशिकाएं होती हैं। कोशिकाएं विद्युत तरंग बनाती हैं, जिससे मस्तिष्क कार्य करता है। जब विद्युत तरंगें अनियंत्रित होती हैं तो मिर्गी का दौरा पड़ता है।



- दौरे का स्पष्ट कारण नहीं : डॉ. कनकने का कहना है कि 60 से 70 रोगियों में मिर्गी रोग के स्पष्ट कारण नहीं होते हैं। माना जाता है कि मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली कोई भी बीमारी मिर्गी रोग को जन्म दे सकती है। सिर की चोट, मस्तिष्क ज्वर, लकवा, ट्यूमर, शराब का अधिक सेवन, जन्मजात विकृति, जन्म के समय दिमाग में ऑक्सीजन की कमी (देर से रोना), ज्यादा पीलिया, मस्तिष्क में संक्रमण, मस्तिष्क की टीवी, तेज बुखार, सोडियम, कैल्शियम व शुगर की कमी आदि कुछ प्रमुख कारण होते हैं।
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- रोगी की कराई जाती हैं ये जांच : रोगी का उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर ईईजी, सीटी स्कैन, एमआरआई कराते हैं। इसके अलावा प्रत्यक्षदर्शी से पूरा विवरण पूछा जाता है क्योंकि रोगी अचेतावस्था में होने की वजह से कुछ नहीं बता सकता है।




- यह प्राथमिक उपचार देना चाहिए
रोगी को बिस्तर या जमीन पर लिटाकर कपड़े ढीले करें
दौरे के बाद करवट से लिटाएं, जिससे लार बाहर निकले
दौरे के समय पानी पिलाने व दवा खिलाने का प्रयास न करें
भिंचे जबड़ों को बलपूर्वक खोलने का प्रयास नहीं करना चाहिए
न ही चम्मच आदि से भिंचे दांतों को खोलने का प्रयास किया जाए
दौरा खत्म होने के बाद तुरंत रोगी को डॉक्टर के पास लेकर जाएं
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