ट्रेनों में अनाधिकृत रूप से स्थानीय कंपनियों का बोतल बंद पानी बेचने का मामला पकड़ा गया है। डीसीएम ने निरीक्षण में दस पेटी बोतलें बरामद की हैं। स्टेशन पर रेल नीर की जगह अनाधिकृत रूप से पानी की बोतलें बेचने के लिए गिरोह चल रहा है। रेल प्रशासन ने इस पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए चेकिंग टीम लगा दी है।
रेलवे ने स्टेशन और ट्रेनों में ‘रेल नीर’ ब्रांड की पानी की बोतलें बेचने की अनुमति दे रखी है। लेकिन, इन दिनों ट्रेनों में अनाधिकृत रूप से स्थानीय कंपनियों का बोतल बंद पानी बेचा जा रहा है। इसकी सप्लाई के लिए कई गिरोह सक्रिय हैं। ट्रेनों में पानी की बोतलें झांसी स्टेशन से ही चढ़ाई जाती हैं। गिरोह के सदस्य पानी को ठंडा रखने के लिए बोरों में बर्फ के बीच बोतलों को रखते हैं। आरक्षण कार्यालय के निकट प्लेटफार्म सात की पटरियों के मंदिर पर बोरों को रखने का अड्डा बनाया गया है। यहां एक बार में एक या दो बोरे ही बोतलों से भरकर रखे जाते हैं। गिरोह के सदस्यों ने भीड़ वाली ट्रेनों को बोतलें सप्लाई करने के लिए चिह्नित कर रखा है, ताकि बोतलों की बिक्री फटाफट हो जाए। डीसीएम नीरज भटनागर ने पिछले दो दिनों में निरीक्षण के दौरान दस पेटी बोतल बंद पानी बरामद किया। यह सभी बोतलें स्थानीय कंपनियों से निर्मित हैं। अनाधिकृत तरीके से ट्रेनों में पानी सप्लाई होने का मामला खुलने के बाद रेल प्रशासन ने चेकिंग टीम तैनात कर दी है। यह टीमें स्थानीय कंपनियों के पानी की बिक्री पर नजर रखेंगी।
जांच टीम रखे है नजर
ट्रेनों में रेल नीर के अलावा अन्य किसी ब्रांड का पानी नहीं बेचा जा सकता है। दूसरी कंपनी का पानी न बिके, इसके लिए लगातार चेकिंग की जा रही है। जांच टीम भी बना दी गई है।
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ।
इन ट्रेनों में खपा रहे बोतलें
स्थानीय कंपनियों का बोतल बंद पानी खपाने वाले गिरोह के निशाने पर लंबी दूरी की ट्रेनें रहती हैं। खासकर पंजाब मेल, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस, अंडमान एक्सप्रेस, मंगला एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक गोरखपुर, ग्वालियर बरौनी मेल, राप्ती सागर एक्सप्रेस समेत करीब 40 ट्रेनों को गिरोह के सदस्यों ने चिह्नित कर रखा है। इन ट्रेनों का स्टापेज बड़े स्टेशनों पर होने के चलते यात्रियों को प्यास तेज लगने लगती है। उनकी बोतलों का पानी गर्म हो जाता है। ऐसे में यात्री को बस ठंडा पानी ही याद रहता है, वह ब्रांड नहीं देखता है। इसका फायदा यह गिरोह उठाते हैं।
15 की बोतल 20 रुपये में
रेल नीर की बोतल 15 रुपये में मिलती है, जबकि स्थानीय कंपनियों का बोतल बंद पानी 20 रुपये में बेचा जा रहा है। मुनाफा अधिक होने के चलते गिरोह के सदस्य ट्रेनों में अनाधिकृत तरीके से इन्हें सप्लाई करते हैं। गिरोह में कई बड़े लोगों के शामिल होने की भी बात कही जा रही है।