बुंदेलखंड को जल्द ही दो नए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की सौगात मिल सकती है। यह केंद्र किसानों की आय बढ़ाने, तकनीक की जानकारी देने के लिए काफी मददगार साबित होंगे। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से एक उत्तर प्रदेश और एक मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने की मांग कुलाधिपति से की गई है। जिसे जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है।
अभी उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों में एक-एक कृषि विज्ञान केंद्र है। झांसी के भरारी में खुला हुआ केंद्र बांदा कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध है। यहां पर पांच कृषि वैज्ञानिक हैं, जो किसानों को समय-समय पर खेती-किसानी से जुड़ी जानकारियां देते रहते हैं। चूंकि, झांसी में ही केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय भी है, जहां पर कई फसलों पर शोध चलता रहता है।
इसके अलावा देश के कई संस्थानों के साथ अनुबंध करके विश्वविद्यालय छात्र-छात्राओं को नई तकनीक पर शोध और उन्नत फसलों की जानकारी करने के लिए भी समय-समय पर भेजता रहता है।
ऐसे में विश्वविद्यालय के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र संचालित होने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। हाल ही में विश्वविद्यालय दौरे पर आए कुलाधिपति प्रो. पंजाब सिंह को इस संबंध में चर्चा कर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में एक-एक कृषि विज्ञान केंद्र खोलने की मांग की गई। चांसलर ने भी सहमति जताई है। ऐसे में जल्द दो नए कृषि विज्ञान केंद्र मिलने की संभावना है।
ये मिलेगी जानकारी
- किसान किस प्रजाति की फसलों को बोएं।
- मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए क्या करें।
- मिट्टी का परीक्षण कर उपयुक्त फसल की जानकारी देना।
- कब पाला पड़ेगा, कब अत्यधिक गर्मी होगी।
- अधिक ठंड व गर्मी से फसलों को कैसे बचाएं।
- कीटनाशक का उपयोग कब और कैसे करें।
- नई तकनीकों के जानकारी किसानों को मिलेगी।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में एक-एक कृषि विज्ञान केंद्र खोलने की मांग कुलाधिपति से की गई है। जल्द ही इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों को नई तकनीक की जानकारी मिलेगी। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में काफी मदद मिल सकेगी।
- डॉ. अरविंद कुमार, कुलपति, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।