झांसी। भीषण गर्मी में रक्सा क्षेत्र में पाइप लाइन से गंदा पानी आने के कारण दस हजार से अधिक आबादी को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें खरीद कर पानी पीना पड़ रहा है। पांच रुपये में दो डिब्बे पानी मिल रहा है। टैंकर 400 रुपये में मिल रहा है। हैंडपंप भी साथ नहीं दे रहे हैँ।
महानगर से दस किलोमीटर दूर स्थित गांव रक्सा सूखा क्षेत्र है। रक्सा में करीब दस हजार की आबादी है। यहां का जलस्तर बहुत नीचा होने के कारण क्षेत्रवासियों को साल भर जल संकट का सामना करना पड़ता है। यहां गर्मियों में तो स्थिति दयनीय होती है, इसके अलावा आम दिनों में भी लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है। चार साल पहले जल निगम ने 2.21 करोड़ रुपये की लागत वाली समूह ग्राम रक्सा पेयजल योजना शुरू की थी।
योजना के तहत रक्सा, डेली, ढिमरपुरा, अठौंदना, पाली पहाड़ी, सिजवाहा गांवों में पानी पहुंचाने का काम किया जा रहा है। सिमरधा बांध पर जल शोधन केंद्र बनाया गया है। सिमरधा बांध से नई टंकी तक पानी लाया जाता है। तत्पश्चात टंकी से उक्त क्षेत्रों में जलापूर्ति की जा रही है। मगर, इन दिनों इस योजना का कोई लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। रक्सा के ठकरास मुहल्ला, राम मंदिर के नीचे ललयाना मुहल्ला, श्रीवास व अथाई मुहल्ले में पाइप लाइन होने के बाद भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जिन मुहल्लों में पानी आ रहा है, उन क्षेत्रों में भी आधे घंटे से अधिक जलापूर्ति नहीं होती है। जल शोधन ठीक से न होने के कारण नलों में गंदा पानी आ रहा है, जिससे लोग उसका उपयोग पीने के लिए नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि बिना फिल्टर के ही कच्चे पानी की सीधे सप्लाई की जा रही है। यह पानी भी आधे घरों को ही मिल पा रहा है। भीषण गर्मी से अधिकांश हैंडपंपों ने भी साथ छोड़ दिया है। मजबूरन लोगों को खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। निजी टैंकर संचालक पानी को बेच रहे हैं।
जल शोधन के बाद ही जलापूर्ति दी जा रही है। अगर गंदा पानी आ रहा है तो इसकी जानकारी नहीं है। मंगलवार को जांच कराई जाएगी। दूसरा, पाइप लाइन चोक होने के कारण भी कई गलियों में पानी नहीं पहुंच रहा है। जल्द ही ऐसी सभी गलियों की पाइप लाइनों का साफ कराया जाएगा। - कुलदीप सिंह, अधिशासी अभियंता जलसंस्थान।
परिवार के साथ रक्सा में किराए के मकान में रहता हूं। रोज परिवार के लिए 50 रुपये का पानी खरीद रहा हूं। एक-एक बूंद पानी बचाना पड़ रहा है। - मुकेश शर्मा, कर्मचारी।
बीएससी की पढ़ाई कर रहा हूं। सुबह सबसे पहले पानी भरने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। इससे मेरी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। - पुनीत प्रजापति, छात्र।
मेरी हेयर कटिंग की दुकान है। सुबह पानी भरने में दो से तीन घंटे का वक्त लग जाता है। इससे वक्त पर दुकान नहीं खोल पाता। बेहद परेशान हूं। - सचिन सेन, दुकानदार।
गेहूं खरीद का काम करता हूं। पानी की परेशानी के कारण मेरा व्यापार प्रभावित है। रोज पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। दूर हैंडपंप से पानी लाता हूं। - विजय गुप्ता, व्यापारी।