झांसी। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग और आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली के कारण झांसी मंडल ने ट्रेनों को समय पर स्टेशन पहुंचाने में रिकॉर्ड कायम किया है। पिछले महीने झांसी मंडल में 83 फीसदी ट्रेनें समय पर स्टेशन पहुंचीं। हाल ही में जारी की गई केपीआई रिपोर्ट में समय पालन में झांसी मंडल ने प्रयागराज को पछाड़ दिया है।
रेलवे लगातार ट्रेनों की रफ़्तार बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। इसके लिए हर ट्रैक पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग का काम पूरा होने के बाद ट्रेनों की चाल और समय में सुधार हुआ है। दरअसल, अब तक हर ट्रैक पर मैनुअल इंटरलाकिंग प्रणाली लागू थी। इसके चलते ट्रैक बदलने के दौरान ट्रेनों की रफ्तार 15 से 30 किमी तक रह जाती थी। झांसी मंडल में करीब दो साल पहले ट्रैकों को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग प्रणाली से लैस करना शुरू किया। लेकिन, अब सभी ट्रैक इस प्रणाली से काम कर रहे हैं। इसका फायदा यह हुआ कि ट्रेनों की रफ़्तार कम नहीं हुई और अब ट्रेनें समय से पहुंच रही हैं। जनवरी के आंकड़ों के मुताबिक पूरे महीने में 83.5 फीसदी ट्रेनें अपने निर्धारित समय और कुछ ट्रेनें समय से पहले झांसी रेलवे स्टेशन पहुंचीं। जबकि, पिछले साल महज 47 फीसदी ट्र्रेनें समय पर स्टेशन आई थीं।
हाल में भारतीय रेलवे की ओर से जारी की गई केपीआई वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार झांसी मंडल में 96.4 फीसदी ट्रेनें समय पर पहुंचीं। इसके चलते झांसी मंडल पूरे देश में सातवें स्थान पर रहा, जबकि प्रयागराज में 95.8 फीसदी ट्रेनें समय पर पहुंच सकीं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक लगातार आधुनिक होती प्रणाली के चलते ट्रेनों की रफ्तार बढ़ी है।
110 किमी रफ्तार से दौड़ेंगीं ट्रेनें
रेल मंडल के पारीछा-नंदखास और सरसोकी-उसरगांव खंड में ट्रेनें अब 110 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौडे़ंगीं। बृहस्पतिवार को हुई समीक्षा बैठक के दौरान इस उपलब्धि पर मंडल के अधिकारियों को बधाई दी गई है। इस मौके पर ट्रेनों के संरक्षायुक्त परिचालन के लिए स्टेशनों और रेलमार्ग पर तैनात कर्मचारियों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियों पर चर्चा की गई। इस मौके पर मंडल रेल प्रबंधक संदीप माथुर मौजूद रहे।