झांसी। सालों से इधर-उधर ऑफिसों में काम करके समय काट रहे ट्रेन चालकों को अब लाइन ड्यूटी पर लगा दिया गया है। चूंकि, इन कर्मचारियों ने लंबे समय से गाड़ी नई चलाई हैं, इस कारण आदेश से संबंधित कर्मचारी परेशान हैं। इनमें कई यूनियन नेता भी हैं।
रेल चालकों का तीन साल के लिए स्टेशनरी वर्क के लिए चयन होता है। संबंधित विभाग के दो अधिकारियों की कमेटी ही इनका चयन करती हैं। चयनित चालकों से क्रू कंट्रोलर, टीएलसी, लॉबी, एएलएफ, एसी शेड व डीजल लोको शेड में ऑफिस वर्क के काम में लगाया जाता है। तीन साल के बाद दो बार कर्मचारी को एक्सटेंशन भी दिया जा सकता है। मगर, इस व्यवस्था का लाभ सिफारिशी व यूनियन से जुड़े कर्मी ही लंबे समय से उठा रहे हैं। ऐसे सभी कर्मचारी इन सीटों पर काम करके पदोन्नत होते चले आ रहे हैं, जबकि ऐसे प्रमोशन पाने के लिए उनको ट्रेन चलाना आवश्यक है। इन्हीं सब शिकायतों के चलते विगत 16 अगस्त को वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता परिचालन ने ऑफिसों में एक ही पद पर वर्षों से जमे एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को लाइन पर भेजने के निर्देश जारी कर दिए। इन कर्मचारियों को अब ट्रेनिंग देकर ट्रेन चलवायी जाएगी। इसके अलावा उक्त पदों पर जमे एक दर्जन कर्मचारियों को भी इधर-उधर कर दिया गया है।
कई चहेते अभी भी नहीं हटे
क्रू कंट्रोलर, टीएलसी, एएलएफ, लॉबी, एसी शेड व डीजल लोको शेड में अभी भी पंद्रह से ऐसे चालक वर्षों से एक ही सीट पर काम कर रहे हैं, जिन्हें अब तक नहीं हटाया गया है। ऐसे चालक अभी भी अफसरों के चहेते बने हुए हैं। इससे अन्य चालकों में रोष व्याप्त है, क्योंकि स्टेशनरी वर्क व्यवस्था के तहत उनको उक्त पदों पर काम करने का मौका नहीं मिल पा रहा है।