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बुंदेलखंड के कारोबारियों को नहीं मिल रहे बालू के खरीददार

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झांसी। बुंदेलखंड के कारोबारियों को दूसरे राज्य में थोक में बालू के खरीददार नहीं मिल रहे हैं। इससे रेलवे में बालू की बुकिंग ठप पड़ गई है। दिसंबर 2020 में पहली बार बांदा व खैरार साइडिंग से करौली राजस्थान के लिए बालू बुक की गई थी, जिसमें रेलवे को 45 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
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बुंदेलखंड से गेहूं, चावल, खली, पेट्रोल- डीजल, केरोसिन, खाद, गिट्टी, सीमेंट दूसरे राज्यों में मालगाड़ी से भेजा जाता है। साथ ही, कुछ समय से ललितपुर स्थित बजाज पावर प्लांट से एश (राख) रूपनगर पंजाब, गाजियाबाद, मैहर व सतना भी भेजी जाने लगी है। मुरैना ने बाजरा का भी लदान होने लगा है। उक्त वस्तुओं का लदान झांसी, रायरु, मालनपुर, ग्वालियर, मुरैना, ललितपुर, दतिया, निवाड़ी,भीमसेन, उरई, डबरा, निवाड़ी व बांदा स्टेशन की साइडिंग से होता है। रेलवे को दिसंबर 2020 में बालू के नए ग्राहक मिले थे। पहली बार बांदा व खैरार साइडिंग से करौली राजस्थान के लिए बालू बुक की गई थी। इससे रेलवे को 45 लाख आय अर्जित हुई थी। लेकिन इसके बाद से दूसरे राज्य के कारोबारी थोक में बालू लेने के लिए तैयार नहीं हुए। क्योंकि उनके पास इतनी बालू एक साथ रखने के लिए जगह नहीं है। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि बालू की बुकिंग के लिए रेलवे तैयार है।
मंडल में 183 फर्म पंजीकृत
रेलवे मालभाड़ा बढ़ाने के लिए नए ग्राहक बनाने का लगातार प्रयास कर रहा है। मंडल में अभी 183 ऑनलाइन फर्म पंजीकृत हैं, जो अपना माल दूसरी जगह भेजते हैं। मंडल को हर महीने मालभाड़े से औसत 60 करोड़ की आय होती है।
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यह भी जानिए
मालगाड़ी के एक वैगन में 1280 बोरा माल रखा जा सकता है। इसी तरह 70 टन बालू को रखा जा सकता है। 58 बक्सों के एक रैक में चार हजार टन बालू आ जाती है।
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