झांसी। सर्दी बढ़ते ही मंडल में रेल फ्रैक्चर (पटरी चटकने) की घटनाएं बढ़ने लगीं हैं। मंगलवार को बिजौली और खजराहा और डबरा व सोनागिर स्टेशन के बीच पटरी चटक गई। इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों ने वक्त पर दोनों जगह इस कमी को पकड़ लिया। इससे कोई दुर्घटना नहीं हो सकी। पिछले एक सप्ताह में चार मामले सामने आ चुके हैं।
मंगलवार की सुबह 8.30 बजे इंजीनियरिंग विभाग के चाबीमैन ने बिजौली व खजराहा स्टेशन के बीच अप ट्रैक के किलोमीटर नंबर 1113/11-09 पर चटकी पटरी को देख लिया। सूचना पर सुबह पहुंचे रेल पथ निरीक्षक ने पटरी पर वेल्डिंग करवाई। इसी तरह कर्मचारियों ने सुबह 8.45 बजे डबरा व सोनागिर स्टेशन के बीच डाउन ट्रैक पर फैक्चर को पकड़ लिया। सबसे पहले कर्मचारी ने डाउन ट्रैक पर आ रही मालगाड़ी को फैक्चर के पहले रुकवाया। इसके बाद रेल पथ निरीक्षक ने फ्रैक्चर को दुरुस्त करवाया। बाद में ट्रेनों को 10 व 20 किलोमीटर प्रति घंटा की धीमी रफ्तार से मौके से गुजारा गया।
तापमान के हिसाब से आकार बदलतीं हैं पटरियां
तापमान के हिसाब से रेल पटरियां भी अपना आकार बदलतीं हैं। गर्मियों में तापमान बढ़ने पर जहां पटरी फैलती है, वहीं सर्दियों में सिकुड़ना शुरू कर देती है। सर्दियों में पटरियों के सिकुड़ने पर एसईजे गैप (दो रेलों का ज्वाइंट) में कभी- कभी क्रैक पड़ जाता है। इसी को रेल फ्रैक्चर (पटरी का चटकना) कहते हैं। अगर यह क्रैक दो इंच से बड़ा है तो ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना बढ़ जाती है। रेलवे के लिए कोहरे के दौरान रेल फ्रैक्चर को तलाशना चुनौती भरा रहता है। हर सेक्शन में इंजीनियरिंग विभाग के रेल पथ निरीक्षक और अधीनस्थ कर्मियों की जिम्मेदारी है कि वह रेल फ्रैक्चर पर हर समय नजर रखे।
ऐसे होती है निगरानी
इंजीनियरिंग विभाग ने सर्दियों के शुरू होते ही रेल फ्रैक्चर पर नजर रखनी शुरू कर दी है। खासकर रात के समय दो स्टेशनों के बीच चाबी मैन पटरियों के चेक करते चलते हैं। दोनों कर्मचारी अपने-अपने स्टेशन से चलने के बाद रास्ते में मिल कर डायरी बदलते हैं। यह डायरी उन्हें लौटकर संबंधित स्टेशन मास्टर को देनी पड़ती है। चाबी मैन को यह पेट्रोलिंग रात में दो बार करनी पड़ती है। इसी तरह, इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी 24 घंटे में दो से तीन बार किसी न किसी ट्रेन के ब्रेकवान में बैठकर मशीन की मदद से जर्क की जांच करते हैं। मशीन के तार पहिये से जुड़े होते है। रास्ते में अगर कोई रेल फ्रैक्चर है तो झटका लगते ही तुरंत फॉल्ट का पता लगा जाता है।