झांसी। पांच महीने हो गए और जल निगम के कर्मचारियों को वेतन का एक धेला भी नहीं मिला है। यह स्थिति अकेले कर्मचारियों की नहीं है, बल्कि पेंशनर्स का भी यही हाल है। इस कारण उन्हें खर्च करने में हाथ सिकोड़ना पड़ रहा है। मजबूरन कर्मचारी और पेंशनर्स प्रतिदिन भोजनावकाश में सत्याग्रह संघर्ष कर रहे हैं। इसमें तीन सौ कर्मचारी और छह सौ पेंशनर्स शामिल हैं। इनका करीब तीन सौ करोड़ रुपया विभाग पर बकाया हो गया है।
उप्र जलनिगम के अधीक्षण अभियंता पंचम मंडल कार्यालय पर सत्याग्रह संघर्ष के दौरान कर्मचारी प्रतिदिन भोजनावकाश अवधि में कोविड- 19 नियमों का पालन करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। संघर्ष समिति के सह संयोजक सीके त्रिपाठी ने बताया कि पांच महीने हो गए, लेकिन वेतन नहीं मिल रहा है। इस कारण करीब तीन सौ कर्मचारियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि खर्च कैसे पूरे करें। सबसे अधिक स्थिति पेंशनर्स की खराब है, क्योंकि उन्हें दवाओं और उपचार के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उधार लेकर किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। पेंशनर्स को पेंशन पूरी नहीं दी जा रही है। 22 प्रतिशत कम मिल रही है और सातवां वेतनमान अब तक नहीं लगाया गया है। करीब छह सौ पेंशनर्स हैं, जिनको पेंशन नहीं मिल रही है।
मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान जनपद संयोजक रोहित चौरसिया, रजनेश साहू, कामता प्रसाद, अभिषेक विश्वकर्मा, विवेक शर्मा, वीरेंद्र सिंह यादव, सोहन पाल, अतुल बुंदेला, परसादी लाल, राजकुमार, सुलेमान खान, प्रदीप तिवारी, वेदप्रकाश, राकेश चौरसिया, राजेश रायकवार, रमेश रायकवार, सुरेश पाठक, कपूरी देवी, विमला देवी, शारदा, सावित्री देवी, जगदीश प्रसाद आदि मौजूद रहे।
पांच महीने हो गए, अब तक पेंशन की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 2006 से 11 तक के वेतन का एरियर भी नहीं मिला है। पेंशनर्स इसी पेंशन पर निर्भर होते हैं। शासन को ध्यान देना चाहिए।
- एके जैन
कर्मचारियों और पेंशनर्स के बड़े खराब हालात हैं। उच्च अधिकारियों के समक्ष कई बार मामले को रखा गया है, लेकिन इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है। इसलिए सत्याग्रह संघर्ष चलता रहेगा।
- रोहित चौरसिया, संयोजक
केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर यह आंदोलन चल रहा है। उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला है। यह पहली बार हुआ है, जब इतने दिनों तक वेतन और पेंशन नहीं मिली है। सत्याग्रह तब तक चलेगा, जब तक वेतन और पेंशन नहीं मिल जाती है।
- सह संयोजक सीके त्रिपाठी
पांच माह से वेतन न मिलना हमारे अधिकारों का हनन है। इस ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि, इससे कर्मचारियों का मनोबल गिरता है। इसलिए जल्द से जल्द पैसे का भुगतान कर देना चाहिए।
- शिल्पी वर्मा