झांसी। प्रेमनगर क्षेत्र में बनने वाली नई कोच फैक्टरी का निर्माण इस साल शुरू नहीं हो सकेगा। रेलवे ने फैक्टरी क्षेत्र में आ रहे क्वार्टरों के कर्मचारियों की दूसरी जगह व्यवस्था होने के बाद ही काम शुरू करने का निर्णय लिया है। पीएम मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना में लगातार देरी होती जा रही है।
प्रधानमंत्री ने 15 फरवरी 2019 को भोजला मंडी में प्रेमनगर में बनने वाली नई कोच फैक्टरी का शिलान्यास किया था। रेलवे बोर्ड ने रेल विकास निगम लिमिटेड को फैक्टरी बनाने का काम सौंपा है। इस फैक्टरी का निर्माण 80 एकड़ जमीन पर होना है। पहले इस फैक्टरी को नगरा हाट के मैदान से कैथड्रिल स्कूल के पीछे तक खाली पड़ी रेलवे की जमीन पर बनना था। लेकिन लोगों के विरोध के कारण नगरा के हाट के मैदान की जमीन को छोड़ दिया गया।
इस जमीन की कमी के पूरा करने के लिए रेलवे आवासों के टूटने की संख्या बढ़ा दी गई है। अब 250 आवास तोड़े जाने हैं, जिसमें अभी तक 190 खाली हो चुके हैं। बाकी आवासों को खाली कराने के लिए केंद्रीय विद्यालय क्रमांक तीन के निकट नए क्वार्टर बनाए ज रहे हैं। नए क्वार्टरों के बनने के बाद कर्मचारियों को वहां स्थानांतरित किया जाएगा। तब कहीं जाकर उक्त आवास तोड़े जा सकेंगे। पूर्व में मई तक कोच फैक्टरी का काम शुरू करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन कोरोना महामारी के चलते क्वार्टरों के बनाने का काम पूरा नहीं हो सका। अब इन क्वार्टरों का काम पूरा होने पर ही कोच फैक्टरी का निर्माण शुरू हो सकेगा।
- नए क्वार्टरों के बनने के बाद ही अब नई कोच फैक्टरी का काम शुरू हो सकेगा। अभी पहली प्राथमिकता पर झांसी- कानपुर दोहरीकरण समेत अन्य परियोजनाओं को पूरा करना है।
संदीप माथुर, डीआरएम।
हर साल बनेंगे 250 कोच
फैक्टरी को स्थापित करने के लिए 454.89 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। इस फैक्टरी में हर साल 250 लिंक हॉफमेन बुश कोच (एचएचबी) को सजाने (नवीनीकरण) का काम होगा। फैक्टरी में एक हजार से अधिक युवाओं को स्थायी रोजगार मिल सकेगा। साथ ही परोक्ष रूप से भी सैकड़ों लोगों को काम मिल सकेगा।
पलटते नहीं एलएचबी कोच
नई कोच फैक्टरी में लिंक हॉफमेन बुश कोच (एचएचबी) का निर्माण होगा। यह एक ऐसी आधुनिक प्रौद्योगिकी है, जो ट्रेन के पटरी से उतरने के दौरान कोचों को पलटने से रोकती है। इन कोचों की गति 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। इनमें एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होता है, जिसके कारण यह कोच आसानी से पटरी से नहीं उतर पाते। ये कोच स्टेलनेस स्टील और एल्यूमीनियम के बने होते हैं।