झांसी। खसरे की नकल लेना हो या जमीन की कराना हो पैमाइश, बगैर जेब ढीली किए तहसीलों में कोई काम नहीं होता। यहां हर काम के बाकायदा रेट तय हैं। बगैर लेन-देन काम कराने की मंशा रखने वाले चक्कर लगाते रह जाते हैं। तहसीलों में घूसखोरी सिस्टम का हिस्सा बन चुकी है।
ग्रामीण क्षेत्र के लोग हों या शहरी, तहसील का सभी से सीधा वास्ता रहता है और यहां सभी कामों की धुरी लेखपाल होते हैं। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, हैसियत प्रमाण पत्र, खसरा बनवाने, जमीन का दाखिल-खारिज कराने, पैमाइश कराने, भूमि का अनापत्ति प्रमाण पत्र आदि समेत सभी कामों में लेखपाल की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है। इन सभी कामों के यहां रेट तय किए हुए हैं। तय रकम देने पर काम हाथों हाथ हो जाते हैं। वरना लोगों को महीनों चक्कर काटने पड़ जाते हैं।
ये तय कर रखे हैं रेट
दाखिल - खारिज - 5,000 से 10,000 रुपये
आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र - 200 रुपये
जमीन की एनओसी - 5000 रुपये
शस्त्र आवेदन पर रिपोर्ट - 500 रुपये
हैसियत प्रमाण पत्र - 100 रुपये प्रति लाख
पैमाइश - जमीन की कीमत के अनुसार
झांसी। जनपद में तैनात कई लेखपालों का रिकॉर्ड दागदार है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले पांच सालों में भ्रष्टाचार निरोधक दस्ता चार लेखपालों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ चुका है। इसके अलावा सिविल कोर्ट द्वारा एक लेखपाल को पांच साल जेल की सजा सुनाई जा चुकी है।
हाल ही में चार महीने पहले भ्रष्टाचार निरोधक दस्ते ने जमीन के दाखिल खारिज की रिश्वत लेते हुए लेखपाल बद्री प्रसाद को रंगे हाथों पकड़ा था। जबकि, इससे पहले लेखपाल पीयूष, संजीव व मुन्नालाल भी रिश्वत लेते हुए भ्रष्टाचार निरोधक दस्ते के हत्थे चढ़ चुके हैं। बावजूद, हालात में सुधार नहीं है। खुलेआम रिश्वत की मांग की जाती है। इसका अंदाजा बृहस्पतिवार को वायरल हुए लेखपाल संतोष गौर के वीडियो से की जा सकती है। इतना ही नहीं, लेखपाल अफसरों पर भी धौंस जमाने में पीछे नहीं हटते। तहसीलदार के साथ अभद्रता करने पर अक्तूबर 2021 में न्यायालय ने लेखपाल जमुना प्रसाद को कोर्ट ने पांच साल के कारावास की सजा सुनाई थी।