झांसी। कई साल गुजर गए, जब उन्हें आखिरी बार देखा था। इसके बाद तो उनकी कोई खबर तक नहीं मिली। जगह-जगह खोजा, पुलिस से भी खूब मनुहार की, लेकिन पता नहीं चल पाया। बावजूद, उम्मीद का दीपक अब भी जल रहा है। भरोसा है कि वे जहां होंगे वहां सुरक्षित होंगे और एक न एक दिन वापस लौटकर जरूर आएंगे। जी हां, यहां बात हो रही है उन 27 महिलाओं की, जिनके पति सालों से लापता हैं। इसके बाद भी पत्नियां हर साल अपने पति की सलामती के लिए करवाचौथ का व्रत धारण करती आ रहीं हैं। उन्हें विश्वास है कि एक न एक दिन करवाचौथ के चांद के साथ उनका भी ‘चांद’ जरूर नजर आएगा।
एक न एक दिन छलनी के पीछे से उनका भी होगा दीदार: विनीता
झांसी। 20 जून 2017 को वो घर से मोबाइल रिचार्ज कराने निकले थे, लेकिन इसके बाद वे लौटकर वापस नहीं आए। उनकी खोज में दर-दर की ठोकरें खाईं, थाने से लेकर पुलिस अधिकारियों की चौखटों पर भी दस्तक दी, परंतु हर ओर से निराशा ही हाथ आई। ये कहना है कुंज बिहारी मंदिर के पास रहने वालीं जीआईसी की लिपिक विनीता ओमरे का। उन्होंने बताया कि बेसिक में शिक्षक अशोक सेन से उनकी शादी 1997 में हुई थी। शादी के बाद तीन बच्चे हुए। परिवार हंसीखुशी के साथ आगे बढ़ रहा था। लेकिन, अचानक वे एक दिन बगैर कुछ बताए गायब हो गए। विनीता ने बताया कि शादी से बाद से ही उन्होंने करवा चौथ का व्रत रखना शुरू कर दिया था और इस परंपरा का अब भी वे निर्वहन कर रहीं हैं। उन्हें विश्वास है कि एक न एक दिन वो घड़ी भी आएगी, जब वे छलनी के पीछे से चांद के साथ अपने पति का भी दीदार करेंगी।
सलामती की दुआ के साथ धारण करते हैं व्रत: सीमा
झांसी। बाबूलाल कारखाने के पीछे रहने वाले पंकज गुप्ता और सीमा गुप्ता की शादी 2002 में हुई थी। पंकज एक फाइनेंस कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। परिवार की बगिया को दो बच्चे महका रहे थे। लेकिन, 24 मई 2017 की तारीख परिवार को एक गहरा जख्म दे गई। पंकज घर से ऑफिस के काम से निकले थे, लेकिन इसके बाद वे लौटकर वापस नहीं आए। जहां जिसने बताया, सीमा वहां उनकी तलाश में पहुंची। स्थानीय पुलिस से लेकर लखनऊ में बैठे अफसरों तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन पंकज का कोई समाचार नहीं मिल पाया। हालांकि, उम्मीद अभी भी कायम है। इसी उम्मीद के बूते पर सीमा पंकज के लापता होने के बाद भी लगातार करवाचौथ का व्रत धारण करती आ रही हैं। इस करवाचौथ पर भी उनकी तैयारी हैं। सीमा कहती हैं कि वे जहां भी हों, खुश हों और सलामत हों, इसी कामना के साथ वे व्रत रखती हैं। एक दिन जरूरी ऐसा आएगा, जब उनके हाथों से वे पानी पीकर अपना निर्जल व्रत पूरा करेंगी।
कोरोना ने छीना 1800 महिलाओं की मांग का सिंदूर
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आकर कई परिवार उजड़ गए हैं। झांसी में 1800 से ऐसी महिलाएं हैं, जिनकी मांग इस महामारी ने सूनी कर दी है। हर साल ये महिलाएं भी करवाचौथ का व्रत पूरे उत्साह के साथ मनाती थीं। पति की दीर्घायु की कामना के साथ निर्जल व्रत धारण करती थीं। लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था। महामारी की चपेट में आकर इन महिलाओं के पति की मौत हो गई। हालांकि, अपने सुहाग को बचाने के लिए इन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन हाथ बेबसी लगीं।