झांसी। बुंदेलखंड में सात जिले। लगभग सवा दो सौ केंद्र। 25 फीसदी कॉलेजों का सीसीटीवी कैमरा बंद रहना। यह बताता है कि तमाम तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने के बावजूद बुंदेलखंड में धड़ल्ले से नकल हो रही है। कई केंद्र छात्रों से नकल कराने के एवज में 20-20 हजार रुपये लेते हैं। हर साल बुंदेलखंड में नकल का कारोबार 10 करोड़ रुपये का है।
नकल के लिए बुंदेलखंड काफी बदनाम रहा है। पिछले कुछ सालों में यहां पर सख्ती हुई मगर इस बार व्यवस्था फिर बेपटरी हो चुकी है। हाल ये है कि कॉलेजों में कैमरे बंद कराकर सामूहिक नकल हो रही है। बुधवार को फिजिक्स द्वितीय का पेपर लीक होने के बाद तमाम परतें खुलती जा रही हैं। बीयू अधिकारियों की पड़ताल में सामने आया है कि लगभग 40 कॉलेजों के कैमरे परीक्षा के दौरान बंद रहते हैं। इसमें से नौ से दस कॉलेज तो ऐसे रहे, जिनके कैमरे कभी खुले ही नहीं। सूत्रोें ने बताया कि बुंदेलखंड में करीब 25 कॉलेज नकल कराने के लिए पहले से ही बदनाम हैं। इन कॉलेजों में तो बाकायदा नकल की गारंटी ली जाती है। ये कॉलेज हर छात्र 20 हजार रुपये लेकर अच्छे नंबरों से पास कराने का ठेका लेते हैं। एक केंद्र पर औसतन 200 परीक्षार्थी होते हैं। ऐसे में बुंदेलखंड में नकल का कारोबार लगभग 10 करोड़ रुपये का है। इसी रकम से कॉलेज सबको मैनेज करके चलते हैं।
जहां पर भी नकल कराए जाने की जरा सी भी आशंका प्रतीत होती है, तत्काल संबंधित केंद्र के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। अब यदि किसी भी परीक्षा केंद्र का सीसीटीवी कैमरा बंद मिलेगा तो तत्काल केंद्र निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. मुकेश पांडेय, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।