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न बिजली के पोल हैं और न ही केबल..ऐसे में कैसे करें बिजली व्यवस्था को बेहतर

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झांसी। बिजली के खंभे नहीं हैं। केबल का भी टोटा है। ट्रांसफारमर ऑयल की भी कमी हो गई। केबल बॉक्स भी स्टोर में नहीं हैं। अब जरा सोचिए कि ऐसे में लड़खड़ाई बिजली व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए तो कैसे। महानगर में ही 100 पोल ऐसे हैं जो पूरी तरह से जर्जर हैं लेकिन इन्हें भी बदला नहीं जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूपों पर इस्तेमाल होने वाले छोटे ट्रांसफारमर का इस कदर टोटा हो गया है कि किसान कनेक्शन के लिए भटक रहे हैं।
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मौजूदा समय में बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बुंदेलखंड विकास निधि, स्मार्ट योजना, रिवैंप योजना और उपभोक्ता जमा योजना चल रही हैं। लेकिन उपकरणों की कमी के कारण इन योजनाओं को रफ्तार नहीं दी जा रही है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से लोग बिजली के पोल के लिए आ रहे हैं मगर स्टोर खाली है। जहां नए कनेक्शन देकर लाइन बनाई जानी है वह भी इस समय बन नहीं पा रही है। पुराने जर्जर तार हटाकर उनके स्थान पर केबल की लाइन डाली जानी है लेकिन केबल की कमी के कारण यह योजना भी फंस गई है। अफसरों का कहना है कि वह लोग उपकरणों की मांग कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही टोटा दूर कर लिया जाएगा।
इन उपकरणों की कमी
बिजली के पोल
ट्रांसफारमर ऑयल
केबल बॉक्स
छोटे ट्रांसफारमर
कनेक्शन मंजूर लेकिन नहीं खिंच पा रही लाइन
झांसी। बिजली अफसरों का कहना है कि बिजली कनेक्शन मंजूर होने के बाद भी वह लोग लाइन नहीं बना पा रहे हैं। पोल बगैर लाइन कैसे खिंचेगी। जिन लोगों के कनेक्शन मंजूर हो गए हैं वह दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। अधिशासी अभियंता डी. यादवेंदु ने बताया कि सैकड़ों उपभोक्ताओं ने नये कनेक्शन के लिए पैसा भी जमा कर दिया, लेकिन विभाग के पास खंभे, केबल और अन्य उपकरण न होने के कारण लाइन तैयार नहीं हो पा रही है।
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स्टोर में नौ मीटर वाले बिजली के पोल और केबल नहीं हैं। इससे उपभोक्ताओं को परेशानी लाजमी है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर आगरा भेजा गया है। जल्द ही सभी बिजली के उपकरण उपलब्ध हो जाएंगे। - राजीव अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, भंडार गृह
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