संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। शहर की पहाड़ियों की हिफाजत नगर निगम नहीं कर पा रहा है। हालत यह है कि संरक्षित जमीन पर चेतावनी वाले चौतरफा बोर्ड लगाने के बाद भी दो हजार से ज्यादा मकान बन गए। सड़कें बन गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं ही निभाई गईं।
लहरगिर्द के बाद बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से सटी पहाड़ी पर भी कुछ इसी तरह मामला है। यहां पहाड़ी को काटकर न केवल स्वरूप बदल दिया गया, बल्कि खनन कर करोड़ों रुपये की मिट्टी बेच डाली गई। सबसे गंभीर मामला यहां पहाड़ी की जमीन को समतल कर अवैध तरीके से प्लॉट बेचने और लोगों को बसाने का है। जिम्मेदारों की लापरवाही का नतीजा है कि एनजीटी के नियमों की अनदेखी कर भू-माफियाओं ने पहाड़ी को काट डाला गया।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से सटे इलाके में अच्छे खासे आकार में पहाड़ी फैली है। शहर के कुछ जमीन कारोबारियों ने पहले पहाड़ी की तलहटी में बस्ती बसाई और यही पर प्लॉट बेचे, लेकिन बाद में पहाड़ी पर कब्जा करने की नीयत से इसे खोदना शुरू कर दिया। मिट्टी खनन कर इसे बाजार में बेच दिया गया। धीरे-धीरे पहाड़ी इलाके के अधिकांश हिस्से को समतल कर दिया गया। अधिकारियों से मिलीभगत इस कदर रही कि पहाड़ी की भूमि को निजी भूमि के रूप में दर्ज भी करा लिया गया।
पिछली सरकार में यह मामला चर्चा में रहा। तत्कालीन जिलाधिकारी ने पहाड़ी खोदने पर रोक भी लगाई थी, लेकिन उनके जाने के बाद यह खेल फिर शुरू हो गया। धीरे-धीरे पहाड़ी पर घर बसाकर पूरी बस्ती स्थापित करा दी गई। ऐसे में यहां न केवल खनिज और राजस्व विभाग को खासा नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि एनजीटी के नियमों का भी खुला उल्लंघन किया गया। हालांकि, यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बावजूद, कारोबारी अभी भी यहां प्लॉट बेच रहे हैं।
शहर में कई और पहाड़ियों पर हुआ कब्जा
झांसी में लहरगिर्द और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से सटी पहाड़ी के अलावा रक्सा स्थित करौनी माता मंदिर के पास, पीतांबरा कॉलोनी के सामने, दिगारा किले के पास के इलाकों में भी पहाड़ियों को खोदकर कॉलोनियां बसाई गई हैं। झांसी में यह खेल बेखौफ चल रहा है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने हुए हैं।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पीछे स्थित पहाड़ी पर निर्माण करने वालों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे। अभी यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। - गौरव कुमार, सहायक नगर आयुक्त, नगर निगम झांसी