अमर उजाला ब्यूरोझांसी। मोबाइल की लत और बिगड़े खानपान की वजह से बेसिक के सात फीसदी से ज्यादा विद्यार्थियों की नजर कमजोर मिली हैं। राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत 326 विद्यालयों में हुई जांच में ये आंकड़े सामने आए हैं। ऐसे में कम उम्र में ही इन विद्यार्थियों को चश्मा चढ़ गया है।
एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से आठ से 12 साल के 26204 विद्यार्थियों की जांच कराई गई। इसमें 2005 यानी आठ फीसदी विद्यार्थियों की नजर कमजोर मिली हैं। राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. रविशंकर ने बताया कि हर महीने विद्यार्थियों का नेत्र परीक्षण करके ऑप्टोमेट्रिस्ट की ओर विभाग को नजर कमजोर मिलने वाले विद्यार्थियों की सूची भेजी जाती है। फिर चश्मा बनवाकर विद्यार्थियों के पास तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने बताया कि सभी 2005 विद्यार्थियों को चश्मे का भी वितरण किया जा चुका है।
बाहरी गतिविधियां कम होने से दूर कम देखना भी वजह वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद कुमार यादव ने बताया कि तीन से चार साल तक के बच्चों को तो मोबाइल कतई नहीं देना चाहिए। बच्चा परेशान न करे और खाना खा ले, इसलिए भी माता-पिता उसको मोबाइल पकड़ा देते हैं। मगर ऐसा करना बच्चे की आंखों के लिए नुकसानदेह है। इसके अलावा बालक और किशोर भी दिन में कई-कई घंटे मोबाइल देखते हैं। इससे उनकी आंखों में तनाव होता है और नजर कमजोर होने लगती है। लगातार स्क्रीन देखते समय पलक न झपकाने से आंसू की परत पर असर पड़ता है। कॉर्निया ड्राई होने से सिर दर्द से लेकर धुंधला तक दिखने लगता है। वहीं, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शमी ने बताया कि बाहरी गतिविधियां कम हो गई हैं। ऐसे में बच्चे दूर की नजर का इस्तेमाल कम करते हैं। इसलिए पास की नजर तो ठीक होती है, मगर दूर की कमजोर हो जाती है। वहीं, माता-पिता में किसी एक या फिर दोनों की नजर कमजोर होने से भी बच्चे की आंख की रोशनी कमजोर हो जाती है।
शिक्षक, अभिभावक ये रखें ध्यान
- अगर स्कूल में बच्चा पीछे बैठता है और बार-बार स्पेलिंग यानी वर्तनी गलत लिखता है तो उसके अभिभावक से आंखों की जांच करवाने के लिए कहें।
- घर पर टीवी चलते समय अगर बच्चा पास आकर देखता है तो अभिभावक नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास ले जाकर उसकी आंखों की जांच जरूर करवाएं।
इन बातों का रखें ध्यान
- हर मिनट कम से कम 10-12 मिनट पलक झपकाएं।
- पढ़ते समय हर आधे घंटे बाद कुछ देर मोबाइल से आंख हटा लें।
- खाने में हरी सब्जियां, विटामिन ए और ई से युक्त भोजन करें।
- दूध के अलावा फलों में आम, पपीता का भी सेवन करें।
आठ में सिर्फ एक नियमित ऑप्टोमेट्रिस्ट तैनात
हर ब्लॉक में एक-एक नियमित ऑप्टोमेट्रिस्ट का पद सृजित है। मगर सिर्फ चिरगांव ब्लॉक में ही ऑप्टोमेट्रिस्ट तैनात है। बाकी, सात ब्लॉकों में पद खाली चल रहे हैं। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नेत्र की जांच कराने आने वालों को जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या फिर निजी अस्पताल जाना पड़ता है। हालांकि, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम यानी आरबीएसके के तहत हर ब्लॉक में एक-एक ऑप्टोमेट्रिस्ट की तैनाती है। यही स्कूलों में जाकर जांच करते हैं।