झांसी। रमजानुल मुबारक के चांद का सभी को बेसब्री से इंतजार था। वह इंतजार शाम को चांद नजर आने के बाद खत्म हो गया। चांद के दीदार के लिए शाम को लोग अपने घरों की छतों पर जमा रहे। चांद नजर आने के बाद लोगों ने एक दूसरे को मुबारकबाद दी और आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया। जिले की तमाम मस्जिदों में रमजान में पढ़ी जाने वाले विशेष नमाज तरावीह भी शुरू हो गई। तरावीह पढ़ाने के लिए बिहार से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से हाफिज आए हैं। कोरोना की वजह से पिछले दो साल से रमजान में भी मस्जिदें खाली थीं। इस बार बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में काफी उत्साह है।
शनिवार को बिसाती बाजार स्थित मस्जिद में हिलाल कमेटी की बैठक हुई। बैठक में रमजान के चांद की तस्दीक की गई। शुक्रवार को खाड़ी के देशों में चांद की तस्दीक होने के बाद तरावीह शुरू हो गई थी। इसलिए शनिवार को देश में चांद निकलने की पहले से ही संभावना थी। मौसम साफ रहने की वजह से साफ चांद नजर आया। बैठक में आमिल कासमी, मुफ्ती साबिर कासमी, मौलाना रिजवान, मौलाना एजाज, हाफिज रियाज, हाफिज गफ्फार, मुफ्ती अनस, हाफिज असद, कारी हसीब, हाजी अज्जू आदि मौजूद रहे। इशा की नमाज के बाद मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की गई। तरावीह की नमाज अब ईद का चांद देखने के बाद भी खत्म होगी। यह नमाज पूरे एक महीने होती है।
एक नेकी का सवाब मिलता है 70 गुना
रविवार को रमजान का पहला रोजा होगा। तपती गर्मी में सब्र और अल्लाह के शुक्र के साथ ही रोजेदार रामजान का रोजा अदा करेंगे। माहे रमजान को इबादतों का महीना कहा जाता है। इस महीने में सवाब का दर्जा सत्तर गुना अधिक होने के कारण अधिकतर लोग इबादतों में वक्त गुजारते हैं। इस पाक महीने में ही लोग अपने माल की जकात को अदा करते हैं। रमजान के महीने सुबह सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक भूखे प्यासे रहकर पाक परवरदिगार की इबादत करते हैं। शनिवार को हिलाल कमेटी की बैठक में चांद की तस्दीक होते ही मस्जिदों में तरावीह शुरू हुई।
सोशल मीडिया में भी खूब चला मुबारकबाद का दौर
रमजान का चांद निकलने के बाद व्हाट्सएप, इंस्ट्राग्राम, फेसबुक पर लोगों ने दोस्तों, रिश्तेदारों को मुबारकबाद दी। इसके साथ ही लोगों ने इस मुबारक महीने में इबादत के दौरान दुआ की भी दरख्वास्त की। विदेश में रहने वाले भारतीय मुसलमानों ने भी सोशल मीडिया पर रमजान की मुबारकबाद दी।