झांसी। अब तक सूखे और कठोर जलवायु के लिए पहचाने जाने वाले बुंदेलखंड में जल्द ही सफेद चंदन की खुशबू भी बिखरेगी। वन विभाग ने झांसी में सफेद चंदन के पौधों को विकसित करने की पहल शुरू की है। इसके लिए सात रेंज में रोपण की तैयारी की जा रही है। विभाग ने 50 हजार पौध की नर्सरी तैयार कर ली है। इन पौधों को तैयार करने के लिए 20 किलो बीज विशेष रूप से केरल से मंगाए गए थे।
डीएफओ विकास यादव ने बताया कि सफेद चंदन के लिए जरूरी परिस्थितियों को देखते हुए झांसी के वातावरण का परीक्षण कराया गया। जांच में यहां की मिट्टी और जलवायु चंदन के अनुकूल पाई गई। सफेद चंदन के लिए करीब 7.5 पीएच वाली मिट्टी, चिकनी मिट्टी और 500 से 625 मिलीमीटर तक वार्षिक वर्षा वाला क्षेत्र उपयुक्त माना जाता है। झांसी में ये परिस्थितियां उपलब्ध हैं।
इसी को देखते हुए वन विभाग ने झांसी, मऊरानीपुर, गुरसराय, गरौठा, टहरौली, चिरगांव और बबीना क्षेत्रों में चंदन की पौध तैयार कराई है। नर्सरी में तैयार हुए अधिकांश पौधे मजबूत स्थिति में हैं। अगले माह से शुरू होने वाले पौधरोपण अभियान में इन्हें वन विभाग की सुरक्षित भूमि पर लगाया जाएगा। संवाद
10 से 12 साल में तैयार होगा पेड़
सफेद चंदन का पेड़ धीरे-धीरे विकसित होता है और पूरी तरह परिपक्व होने में करीब 10 से 12 वर्ष का समय लेता है। अनुकूल परिस्थितियों में इसकी ऊंचाई 18 से 20 मीटर तक पहुंच सकती है। पेड़ के परिपक्व होने के बाद ही लकड़ी में खुशबू विकसित होती है।
मूल्यवान होने के कारण रहेगी निगरानी
सफेद चंदन की लकड़ी काफी मूल्यवान मानी जाती है। इसका उपयोग इत्र, औषधि और अन्य उद्योगों में किया जाता है। इसी वजह से पौधों को वन विभाग की निगरानी में सुरक्षित क्षेत्रों में लगाया जाएगा। डीएफओ के अनुसार शुरुआती आठ वर्षों तक पेड़ को विशेष बाहरी सुरक्षा की जरूरत नहीं होती, लेकिन लकड़ी तैयार होने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित रेंज के रेंजर और वन कर्मियों की होगी।
हरियाली के साथ आर्थिक संभावना भी
वन विभाग की इस पहल से जहां बुंदेलखंड के वन क्षेत्र में विविधता बढ़ेगी, वहीं भविष्य में सफेद चंदन के जरिये आर्थिक संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं। स्थानीय स्तर पर नए प्रजाति के वृक्ष को बढ़ावा मिलने से पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
चंदन वन में बचे गिने-चुने पेड़
ललितपुर के ब्लॉक बार स्थित चंदन वन करीब सात दशक पहले विकसित किया गया था। करीब पांच एकड़ क्षेत्रफल में यहां चंदन के सैकड़ों पाैधे लगाए गए थे, लेकिन अब गिने-चुने पुराने पेड़ ही बचे हैं। बताया जाता है कि ज्यादातर पेड़ चोरों की भेंट चढ़ गए। करीब 20 वर्ष पहले यहां दूरदर्शन के धारावाहिक ‘मुझे चांद चाहिए’ की शूटिंग भी हुई थी।