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मरीज को चकरघिन्नी बनाए रहे डॉक्टर, चली गई जान

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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में मरीज के इलाज में चरम की लापरवाही सामने आई है। रोगी को इमरजेंसी से ओपीडी और ओपीडी से इमरजेंसी डॉक्टर टरकाते रहे। साढ़े तीन घंटे तक उसका पर्चा नहीं बन पाया। दर्द से कराहती हुई महिला ने आखिरकार मेडिकल कॉलेज में ही दम तोड़ दिया।
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कटेरा निवासी महिला को परिजन गंभीर हालत में इलाज के लिए सोमवार को मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे। बताया गया कि महिला की आंत फटी हुई थी। इस कारण पेट फूल गया था। उसका ब्लड प्रेशर लगातार कम होता जा रहा था। महिला को जब परिजनों ने ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने सीधे इमरजेंसी ले जाने के लिए कहा। जब परिजन उसे इमरजेंसी लेकर पहुंचे तो उसे ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने की बात कही। मरीज को लेकर परिजन कभी ओपीडी तो कभी इमरजेंसी लेकर दौड़ते रहे। अस्पताल परिसर में साढ़े तीन घंटे बीत जाने के बाद भी मरीज का पर्चा नहीं बन पाया। डॉक्टरों द्वारा की कई इस घोर लापरवाही की वजह से मरीज की जान चली गई। मामला संज्ञान में आने पर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने इमरजेंसी में तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर का एक दिन का वेतन रोक दिया है। जबकि, सर्जरी विभाग के दो जूनियर डॉक्टरों का नोटिस जारी करते हुए सर्जरी विभागाध्यक्ष से पूरे मामले में रिपोर्ट तलब कर ली है।
इमरजेंसी में घंटों मरीजों का नहीं होता इलाज
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में गंभीर मरीज ही इलाज कराने के लिए आते हैं। मगर यहां पर मरीजों का घंटों इलाज नहीं किया जाता है। पर्चा बनाने के बाद मरीज को बेड पर लिटा दिया जाता है। काफी समय तक संबंधित विभाग का डॉक्टर उसको देखने के लिए पहुंचता है। मेडिकल कॉलेज अधिकारियों के पास इस तरह की शिकायतें लगातार पहुंच रही हैं।
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कटेरा की महिला के इलाज में लापरवाही सामने आने पर ईएमओ का वेतन रोक दिया है। सर्जरी विभाग के दो जेआर को नोटिस दिया है। सर्जरी विभागाध्यक्ष से पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने पर इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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