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बच्ची का खून से सना शरीर बता रहा था दरिंदे की हैवानियत की कहानी

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झांसी। पांच साल की मासूम बच्ची जो अभी चलना सीख रही थी। रिश्तों को पहचाने की कोशिश कर रही थी। दिन भर अपनी मीठी जुबान से मां संग लाड़ लड़ाती थी, आज अपने सामने उसका बेजान शरीर पड़ा देखकर मां के तो जैसे प्राण ही निकल गए। वह बेसुध होकर गिर पड़ी। बाप भी अपनी लाडली का खून से सना शरीर देखकर पछाड़ खाकर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने उसे किसी तरह संभाला। बाप ने अपनी बिटिया के लिए कितने सपने देखे थे। पढ़ा-लिखाकर उसे वह अपने पैरों में खड़ा करना चाहता था लेकिन, उसे क्या पता कि उसका यह सपना किसी दरिंदे के हवस का शिकार हो जाएगा। बार-बार उसका पिता पास में खड़े लोगों से डबडबाई आंखों से अपनी बिटिया के बारे में बात करता था। फिर सिर पकड़कर रोने लगता।
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उधर, बिटिया का शव देर-शाम जैसे ही गांव पहुंचा तो घर में कोहराम मच गया। मां और बहनों के रोने की आवाज से पूरा गांव दहल उठा। मां अपनी लाडली बिटिया के कपड़े लेकर जार-जार रोती रही। ऐसी हालत में पड़ोस की महिलाएं भी उसे समझाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थीं। घूंघट की ओट में गांव की महिलाएं सुबक रही थीं। घर के पास मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखें नम दिखाई पड़ीं।
दरिंदे की हैवानियत की कहानी बिटिया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी बयां करती है। वारदात के वक्त दरिंदा पूरी तरह शैतान बन चुका था। फूल सी बच्ची चीख न सके इसके लिए उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था। वह सांस तक नहीं ले पा रही थी। हैवानियत के निशान मासूम के पूरे शरीर पर थे। बच्ची के सिर, पीठ एवं सीने में गहरे जख्म मिले हैं। उस मासूम को बेदर्दी से नाखून से खरोंचा गया। उसके नाजुक अंगों पर गहरे जख्म बने थे। शरीर पर जगह-जगह खून के धब्बे थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखकर पुलिसकर्मी तक सिहर उठे। जिस किसी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में सुना उसने ही अपना कलेजा थाम लिया। दरिंदे की हैवानियत सोचकर ही लोग गुस्से से भर उठे। ग्रामीणों के भीतर इस जघन्य वारदात को लेकर गहरी नाराजगी दिखाई पड़ी।
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