तीसरी लहर से पहले ही बच्चों में दिखा कोरोना का गंभीर रूप, एमआईएस की चपेट में आए आठ बच्चे
झांसी। कोरोना की तीसरी लहर से पहले ही बच्चों में भी इसका गंभीर रूप सामने आने लगा है। झांसी में कोरोना से ठीक हो चुके आठ बच्चों में ‘मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम इन चिंड्रन’ (एमआईएस-सी) पाया गया है। यह कई बीमारियों का समूह होता है। इस सिंड्रोम में शरीर के कई अंग प्रभावित हो जाते हैं। साथ ही कई बच्चों की हालत गंभीर भी हो गई। हालांकि, इलाज के बाद यह सभी ठीक हो गए।
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम कोई बीमारी नहीं है। इसे लक्षणों पर आधारित सिंड्रोम कहा जाता है। इसके शिकार बच्चों के फेफड़ों, दिल, पाचन तंत्र, गुर्दे, त्वचा, मस्तिष्क और आंखों में इंफेक्शन हो जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना से उबर चुके बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के तहत आंखें लाल होना, शरीर पर दाने उभरना, जुबान लाल होना, धड़कनें तेज होना, सुस्ती आना, सांस फूलना, हृदय रोग के लक्षण नजर आ रहे हैं। ऐसे में उनका समुचित और समय पर इलाज जरूरी है। कई बार यह संक्रमण बच्चों को बुरी तरह से प्रभावित करता है। यह संक्रमण (कोविड-19) होने के दो से छह सप्ताह के बाद होता है। झांसी में हाल ही में मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में एमआईएस-सी के आठ मामले सामने आ चुके हैं। बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर बच्चों का समय से इलाज कराने की सलाह दे रहे हैं।
ये हैं लक्षण
- तीन दिन से ज्यादा बुखार
- आंख में पानी आना
- शरीर पर दाने या चकत्ते
- दस्त लगना
- सांस तेज चलना
- मुंह में छाले आना
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हाल ही में एमआईएस-सी से पीड़ित कुछ मामले सामने आए हैं। दो से लेकर 12 साल तक के बच्चों में यह बीमारी देखने को मिली है। कुछ की हालत गंभीर भी थी। हालांकि, उपचार के बाद सभी बच्चे ठीक हो गए। इस बीमारी में ह्रदय में समस्या होने पर बच्चे गंभीर हो जाते हैं। कई बार शॉक में भी चले जाते हैं। ऐसे में इसके लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। - डॉ. आराधना कनकने, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज।