शिक्षक, कर्मियों को गले नहीं उतर रही बीयू की राहत योजना
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में कोरोना से जान गंवाने वाले स्टाफ को आर्थिक मदद देने के लिए तैयार की गई योजना शिक्षक और कर्मचारियों के गले नहीं उतर रही है। सोशल मीडिया ग्रुप से लेकर ज्ञापन तक में इस पर आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है। बीयू कर्मचारी महासंघ ने मांग की है कि सभी का समान रूप से एक या दो दिन का वेतन काटा जाए।
बीयू में कई शिक्षक और कर्मचारियों की कोरोना से मौत हो चुकी है। इस महामारी में सभी ने एकसुर में जान गंवाने वाले स्टाफ के परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए मांग उठाई। बीयू प्रशासन ने फैसला लिया कि कर्मचारी की मौत पर कर्मी और शिक्षक की मृत्यु पर टीचर आर्थिक सहयोग करेंगे। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन अथवा मानदेय से प्रत्येक मृतक के लिए एक-एक हजार और शिक्षकों के वेतन से दो-दो हजार रुपये काटा जाएगा। इस पर कई शिक्षक और कर्मचारियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। सोशल मीडिया ग्रुप पर भी इस फैसले का जमकर विरोध हो रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि 20 हजार रुपये पाने वाला कर्मचारी भी एक हजार रुपये दे और एक लाख पाने वाला भी एक हजार दे, ये कैसा नियम है। इसी तरह, 40 हजार पाने वाला शिक्षक दो हजार दे और ढाई लाख पाने वाला भी दो हजार दे, ये तो असमानता है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ कार्यकारी अध्यक्ष उमेश करौरिया का कहना है कि चार नियमित प्रोफेसरों की कमेटी बनी है, जो कि बीयू प्रशासन को भ्रमित कर रहे है। किसी भी आपदा में सरकार की तरफ से भी एक दिन का वेतन काटने का नियम है। हम तो दो दिन का वेतन देने को तैयार हैं। इसलिए एक या दो हजार नहीं, बल्कि एक या दो दिन का वेतन काटकर समान रूप से मृतकों के परिजनों की आर्थिक मदद की जाए। इस महामारी में शिक्षक और कर्मचारियों को अलग-अलग नजरिये से न देखा जाए।