अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ठंड में ह्रदय ही नहीं लकवा रोगियों की भी संख्या काफी बढ़ गई है। इमरजेंसी में पैरालाइसिस (लकवा) के रोज आठ-नौ रोगी आ रहे हैं। एक पखवाड़े में 110 से ज्यादा रोगी भर्ती हुए हैं। डॉक्टरों का कहना है लकवा होते ही रोगी को तत्काल अस्पताल पहुंचाएं क्योंकि एक मिनट में 20 लाख कोशिकाएं ऑक्सीजन व पोषण की कमी से नष्ट हो जाती हैं। इससे रोगी की हालात गंभीर हो जाती है और जीवन संकट में पड़ जाता है।
डॉक्टरों ने बताया कि 50 वर्ष से ज्यादा आयु के लोगों में ठंड के चलते लकवा की आशंका ज्यादा रहती है। खासतौर से मानसिक तनाव, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, हाई कोलेस्ट्रोल के रोगियों को खतरा ज्यादा होता है। चिकित्सकों ने बताया कि हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नता, चेहरे का तिरछा होना, बोलने या समझने में दिक्कत, लड़खड़ाहट, व्यवहार में परिवर्तन, सिर दर्द, चक्कर या उल्टी आना लकवा के लक्षण हैं।
उन्होंने बताया कि 30 फीसदी से ज्यादा लोगों में समय से पहले से कुछ लक्षण आते हैं, मगर नजरअंदाज करने की वजह से दिक्कत बढ़ जाती है। खतरा ठंड में ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकि नसें सिकुड़ जाती हैं और रक्त संचार भी प्रभावित हो जाता है। ऐसे में दिमाग में रक्त और ऑक्सीजन की कम मात्रा होने से लकवा का अंदेशा होता है।
0- लकवा से बचाव के उपाय
- संतुलित व कम वसा का आहार लें
- 40-45 मिनट पैदल चलें या व्यायाम करें
- मानसिक तनाव से बचें
- पुराने लकवा के रोगी दवाएं नियमित लें
0-वर्जन
सर्दी में लकवा के रोगियों की संख्या काफी बढ़ गई है। एक पखवाड़े में 100 से ज्यादा रोगियों को चिंताजनक हालत में भर्ती कराया गया है। - डॉ. अरविंद कनकने, न्यूरोफिजिशियन, मेडिकल कॉलेज