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Jhansi News: बारिश से हुए नुकसान का सर्वे शुरू, फसली बीमा का पोर्टल भी करने लगा काम

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संवाद न्यूज एजेंसी



झांसी। इस साल बारिश के कारण किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें फसली बीमा का लाभ दिलाने के लिए राजस्व विभाग की टीमों ने सर्वे शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर होने से किसान अब अपना प्रीमियम 14 अगस्त तक भर सकते हैं।

मानसून के समय पर आने से किसानों के चेहरे खिल उठे थे पर उन्हें नहीं मालूम था ये बारिश उनके लिए आफत बन जाएगी। जिन किसानों ने खरीफ की फसल की बुआई की थी उसमें से मूंगफली, उर्द, मूंग को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा। यही कारण रहा कि इस साल मौसम विशेषज्ञों की चेतावनी के बाद से किसानों ने धान की रोपाई की, लेकिन बीच-बीच में बारिश के रुकने पर अन्य फसल जैसे की मूंग, मूंगफली और उर्द की बुआई की थी। लेकिन, जब-जब बुआई की तब-तब बारिश हो गई। इससे खेतों में पानी भर जाने से किसानों के खेतों के बीज सड़ गए या फिर तेज बहाव में बह गए। कुछ स्थानों पर मूंगफली की पैदावार हुई भी तो धूप न निकलने से वह पीली पड़ने लगी थी। किसानों की फसलों को कितना नुकसान हुआ। इसका आकलन करने के लिए शासन के आदेश के बाद राजस्व विभाग की टीमें मैदान में उतर गईं और किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर रिकॉर्ड तैयार कर रही हैं। वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए किसान अब ऑनलाइन प्रीमियम के लिए आवेदन कर सकते हैं, क्योंकि बीते कई दिनों से पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण इस पर किसान प्रीमियम नहीं भर पा रहे थे। इसलिए उन्होंने कृषि विभाग में ऑफलाइन आवेदन करना शुरू कर दिया था।
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फसली बीमा के लिए ऐसे करें आवेदन, ये दस्तावेज जरूरी



बीमा कराने के लिए किसानों को आधार कार्ड, खतौनी, बैंक पासबुक और फसल के विवरण जैसे दस्तावेज आवश्यक हैं। किसान बीमा कराने के लिए बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर या ऑनलाइन पोर्टल www.pmfby.gov.in पर कर सकते हैं। कृषि विभाग ने कृषकों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि से पहले अपनी फसलों का बीमा कराकर इस योजना का लाभ उठाएं। साथ ही उन्हें यह भी सलाह दी गई है कि नुकसान होने पर 72 घंटे के भीतर नजदीकी फसल बीमा केंद्र या हेल्प लाइन नंबर पर सूचित करें, ताकि बीमा का लाभ समय पर मिल सके। किसान लाभ पाने के लिए 14 अगस्त तक प्रीमियम भर कर ले सकते हैं।

कई बार साइबर कैफे पर जा चुका हूं लेकिन बीमा की साइट नहीं खुलने से हर बार उसे हताश होना पड़ रहा है उसने मूंगफली की एक कुंतल तथा उड़द मूंग की फसल 50 किलो के करीब बोई थी। लेकिन, बरसात की वजह से कुछ पानी में बह गई और बची खुची फसल खेतों में पानी भरने से नष्ट हो गई। कैलाश नारायण विश्वकर्मा
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मूंग की फसल दो एकड़ से अधिक में बोयी थी, लेकिन बारिश की वजह से फसल का बीज पानी भर जाने केे कारण पूरा बीज सड़ गया। अब किसी भी फसल को बोने का उचित समय भी नहीं है। बीच-बीच में हो रही बारिश के बाद और जोखिम उठाने कि हिम्मत भी नहीं पड़ी। नुकसान के लिए बीमा करा लिया है। लाल सिंह यादव
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