झांसी। सालों से बदहाली की मार झेल रहे सुकवां ढुकवां बांध के दिन बहुरने वाले हैं। वन विभाग इसे ईको टूरिज्म की तर्ज पर टूरिस्ट प्वाइंट में तब्दील करने की योजना तैयार कर रहा है। इसके लिए करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रदेश सरकार ने इसकी अनुमति प्रदान कर दी है। केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलते ही योजना को अमली जामा पहनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
जिला मुख्यालय से महज 40 किलोमीटर दूर स्थित सुकवां ढुकवां बांध को वर्ष 1909 में अंग्रेजी शासन काल मेें बनाया गया था। इस बांध के बीच के बीच में सुरंग होने के कारण यह विश्व धरोहर में शामिल होने के लिए भी चयनित किया गया है। यह बांध हमेशा से ही सैलानियों की पहली पसंद रहा है। जिसके चलते हर समय यहां पर सैलानियों की भीड़ जमा रहती है।
ऐसे में वन विभाग द्वारा बांध को ईको टूरिज्म की तर्ज पर विकसित करने की योजना तैयार की गई है। योजना के तहत बांध के चारों ओर हरियाली के लिए पौधे लगाए जाएंगे। लोगों के बैठने के लिए चारों ओर बेंच भी लगेगी। बांध के चारों ओर ऊबड़-खाबड़ पड़ी जगह को पार्क में तब्दील किया जाएगा। बांध के चारों ओर आधुनिक लाइटों को लगाया जाएगा। वहीं सैलानियों के ठहरने के लिए बांध के करीब पांच हट (झोपड़ी) बनाई जाएंगी। यहां रुकने वाले सैलानियों से किराया लिया जाएगा।
सुकवां ढुकवां बांध को दो करोड़ रुपये की लागत से ईको टूरिज्म की तर्ज पर विकसित करने की योजना को तैयार किया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया गया है। केंद्र सरकार की मुहर लगते ही निर्माण कार्य को शुरू कर दिया जाएगा।
पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक, बुंदेलखंड जोन