टहरौली। पिपरा गांव निवासी भगवत दिल्ली में काम करने के लिए गया तो वहीं का ही होकर रह गया। उसकी काम करने के दौरान उसकी मुलाकात शिवानी से हो गई। शिवानी के मां-बाप नहीं थे। इसलिए दोनों ने शादी कर ली। इन दोनों में बहुत प्रेम था। इसी बीच वह गर्भवती हो गई तो दोनों काफी खुश थे। उनका कहना था कि अब तो परिवार में जल्द ही नन्हा मेहमान आ जाएगा। इसी बीच लॉकडाउन की वजह से काम धंधा बंद हो गया। दिल्ली में रहने में भी दिक्कत होने लगी तो वह दोनों पैदल ही अपने गांव आ गए। यहां पर दोनों अकेले ही अपने घर में रह रहे थे।
गांववालों का कहना है कि भगवत के पिता की मौत बहुत पहले हो चुकी है। उसकी मां ने दूसरी शादी कर ली है। इसके बाद से दोनों भाइयों का मां से भी कोई संपर्क नहीं रहा है। यहां पर घर में ताला लगा रहता है। उसकी खेती में चाचा ही देखते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से यहां आने पर अब कहता था कि वह दिल्ली नहीं यहीं पर खेती करेगा। ग्रामीणों ने बताया कि उसकी मां मम्मो शहर में ही रहती हैं। उसने पहले पति की मौत के बाद दूसरी शादी कर ली थी। पहले उसका बड़ा भाई गब्बर दिल्ली में काम करने गया था। इसके बाद वह भी दिल्ली चला गया। कहीं पर काम करते करते उसकी मुलाकात शिवानी से हो गई। धीरे-धीरे दोनों में प्रेम संबंध हो गए। भगवत के दोस्तों ने बताया कि दो साल पहले उसने शादी कर ली। इसके बाद दिल्ली में ही कमरा लेकर दोनों रहते थे। इसी बीच उसकी पत्नी को टीबी हो गई। दिल्ली में उसकी इलाज चल रहा था। लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद हो गया। इस बीच वह पत्नी के साथ गांव आ गया।
चार-पांच दिन पहले उसकी पत्नी की तबीयत खराब हो गई। इस पर वह अकेले ही उसको लेकर मेडिकल कॉलेज ले गया। वहां पर उसका इलाज कराता रहा लेकिन गुरुवार को मौत होने पर वह टूट गया। इसके बाद गांव आने पर उसने अपने चाचा रामस्वरूप रायकवार को इसकी जानकारी दी। देर तक वह खेत पर ही उन लोगों के आने का इंतजार करता रहा लेकिन कोई भी नहीं पहुंचा। इसके बाद उसने सुसाइड नोट लिखकर फांसी लगाकर जान दे दी। सुसाइड नोट में लिखी इबारत बता रही है कि अपनों के पत्नी के दाह संस्कार के लिए भी न आने पर वह किस तरह टूट गया था। वह अपनी बुआ को भी बहुत चाहता था। वह दूसरे गांव में रहती है। इसलिए उनसे अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसके हिस्से की जमीन बुआ को दी जाए।