झांसी। अब बेटियां सिर्फ घरेलू कामकाज तक ही खुद को सीमित नहीं रखना चाहतीं। घर की दहलीज लांघकर वो पढ़ लिखकर अपने ख्वाबों को पूरा करना चाहती हैं। इसी वजह से झांसी में पिछले पांच सालों में आधी आबादी की स्कूल जाने की दर छह फीसदी बढ़ गई है। जिले में अब लगभग 70 फीसदी महिलाएं शिक्षित हैं।
जिले की कई बेटियों ने शिक्षा, खेल, एक्टिंग, फैशन, कारोबार, एग्रीकल्चर समेत तमाम क्षेत्रों में अपना दमखम दिखाकर झांसी का नाम रोशन किया है। ये बेटियां समाज के लिए रोल मॉडल के रूप में उभर चुकी हैं। इसी वजह से आधी आबादी में जागरूकता आई है। नेशनल फेमिली हेल्थ सर्व-5 (एनएफएचएस) के आंकड़ों पर गौर करें तो छह या उससे अधिक साल की बालिकाओं, युवतियों के स्कूल पहुंचने की दर में 6.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। जबकि, 10 या उससे अधिक वर्ष की बालिकाओं, युवतियों के स्कूल में पढ़ने की दर में भी साढ़े छह प्रतिशत का इजाफा हुआ है। अब जनपद में 69.2 प्रतिशत महिलाएं पढ़ी लिखी हो गई हैं। हालांकि, एनएफएचएस-4 के सर्वे में इस पर कोई आंकड़ा रिपोर्ट में दर्ज नहीं हुआ था। मगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मनाना है कि जिस तरह स्कूल जाने की दर बढ़ी है। इससे स्पष्ट है कि साक्षरता दर में भी छह से सात प्रतिशत का इजाफा हुआ होगा।
पांच सालों में ये आया अंतर
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संकेतक एनएफएचएस-5 एनएफएचएस-4
छह या उससे अधिक वर्ष की महिलाएं जा रहीं स्कूल 71.1 64.8
अब झांसी में कितने फीसदी आधी आबादी पढ़ी लिखी 69.2 कोई आंकड़ा नहीं
10 या उससे अधिक साल की महिलाएं स्कूल जा रहीं 43.3 36.8
शिक्षा समाज के अच्छे स्वास्थ्य के लिए एक असरदार वैक्सीन है। सभी बालिकाओं को शिक्षा देने से ही समाज स्वास्थ्य व खुशहाल होगा। खुशी की बात है कि एनएफएचएस-5 के सर्वे में साक्षरता और स्कूल जाने की दर में इजाफा हुआ है। - आनंद चौबे, मंडलीय परियोजना प्रबंधक, एनएचएम।