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स्कूलों में नहीं बढ़ी बच्चों की हाजिरी, अभिभावक नहीं हो रहे राजी

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झांसी। कोरोना काल मेें 10 फरवरी से खोले गए जूनियर हाईस्कूलों में कम ही बच्चे पहुंच रहे हैं। अब तक स्कूलों में बच्चों की हाजिरी 25 फीसद तक सिमटी हुई है। कोरोना के खौफ के चलते अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राजी नहीं हो रहे हैं। आलम यह है कि कई स्कूलों में तो अब तक पढ़ाई शुरू ही नहीं हुई है। जबकि, स्कूलों की ओर से लगातार अभिभावकों को संदेश भेजे जा रहे हैं। वहीं, एक मार्च से प्राइमरी स्कूलों को खोलने के लिए चल रही तैयारियों को लेकर भी अभिभावक सहमत नहीं हैं।
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कोरोना काल में मार्च 2020 से स्कूलों को बंद कर दिया गया था। इसके बाद शासन की ओर से 10 फरवरी को कक्षा छह से आठ तक के स्कूल खोले गए। इसके लिए बच्चों को अभिभावकों का सहमति पत्र लाना था, लेकिन पहले दिन करीब 10 फीसद बच्चे ही स्कूल पहुंचे। वहीं तीन दिन बाद भी स्कूलों में छात्र संख्या में इजाफा नहीं हो सका है। अब तक महज 25 फीसद बच्चे ही स्कूल गए हैं। जिले के निजी विद्यालयों की बात करें, तो 200 से अधिक विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति महज 20 फीसद तक सिमटी हुई है। परिषदीय विद्यालयों का हाल तो इससे ज्यादा खराब है। जिले के 700 परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी 14 हजार बच्चों में से महज दो हजार बच्चे पहुंच सके हैं। अभिभावक मनोज कुमार कहना है कि कोरोना का खौफ अभी कम नहीं हुआ है। छोटे बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में अभिभावक सत्र पूरा होने के बाद बच्चों को स्कूल भेजने की वकालत कर रहे हैं।
परीक्षाएं कराओ तो कोर्स में रियायत दो
स्कूलों की ओर से मार्च के अंत में परीक्षाएं कराने की तैयारी की जा रही है। मगर अधिकांश अभिभावक इसके लिए तैयार नहीं है। अभिभावक उमेश कुशवाहा का कहना है कि पूरे साल बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई की है। सत्र की समाप्ति पर परीक्षाएं कराई भी जाएं, तो बच्चों को कोर्स में रियायत दी जाए।
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सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हो रहा पालन
सरकार ने स्कूलों को खोलने के दौरान कोविड गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन तमाम स्कूलों में कोविड गाइडलाइन का पालन नहीं हो पा रहा है। स्कूलों में छुट्टी के वक्त बच्चों को एक साथ छोड़ा जाता है, तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है।
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