हड़ताल के दौरान मेडिकल कॉलेज के स्पोर्ट मैदान में प्रदर्शन करते प्रदेश की ए़ंबूलेंस सेवा 108 व 102 क?
झांसी। ठेके पर कार्यरत एंबुलेंस चालकों व कर्मचारियों द्वारा की गई हड़ताल के चलते दूसरे दिन भी एंबुलेंस के पहिये थमे रहे। जिसके चलते मरीजों और तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। कई बार वार्ता के बाद भी एंबुलेंस कर्मचारी लिखित रूप से आश्वासन देने पर अड़े रहे। जिसके चलते जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा रोडवेज बस के चालकों को एंबुलेंस चलाने की जिम्मेंदारी सौंप दी गई है।
एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम (एएलएस) को संचालित करने का ठेका अन्य कंपनी को दिए जाने पर कंपनी द्वारा पुराने कर्मचारियों को निकाल कर नए कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को शुरू किया गया था। जिससे नाराज कर्मचारियों द्वारा विरोध किया जा रहा था। एएलएस कर्मचारियों के समर्थन में 108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारियों के आते ही मंगलवार से ही कर्मचारियों द्वारा सभी एंबुलेंस को खड़ा कर हड़ताल कर दी गई थी। कई बार वार्ता होने के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकलने पर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा रोडवेज बस चालकों द्वारा एंबुलेंस को संचालित करने का निर्णय लिया गया। जिसके चलते रोडवेज बस चालकों द्वारा 28 एंबुलेंस को चलाकर एंबुलेंस सेवा को सुचारु किया गया है। जबकि चालक नहीं होने की दशा में 26 एंबुलेंस अभी भी मेडिकल कॉलेज स्थित खेल मैदान में खड़ी हुई हैं। वहीं हड़ताली कर्मचारियों ने बताया कि विभाग के अधिकारियों द्वारा हड़ताल खत्म करने के लिए लगातार धमकियां देकर हड़ताल खत्म करने का दवाब बनाया जा रहा है।
सरकारी आदेश के अनुसार रोडवेज के चालकों को एंबुलेंस चलाने की जिम्मेंदारी दी गई है। 28 एंबुलेंस को मरीजों की सेवा में लगा दिया गया है। 26 एंबुलेंस अभी भी मेडिकल कॉलेज के खेल मैदान पर खड़ी हैं। चालकों की व्यवस्था की जा रही है। बृहस्पतिवार तक सभी को नियमित कर दिया जाएगा।
दिनेश सिंह, मंडल प्रबंधक, एंबुलेंस
एंबुलेंस नहीं चलने से परेशान हुए मरीज और तीमारदार
झांसी। एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल होने के कारण शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। एंबुलेंस सेवाएं नहीं मिलने के कारण मोटर साइकिल, आपे और निजी वाहनों से मरीजों का इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल लाया गया। सबसे अधिक परेशानी का सामना आकस्मिक स्थिति के मरीजों को करना पड़ा।