संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। भोजला की रहने वाली द्रोपती ने सात साल पहले 10-10 रुपये इकट्ठा कर समूह बनाकर छोटा सा व्यवसाय शुरू किया। इसके बाद, कदम आगे बढ़ते गए। हर साल उनके व्यवसाय को बढ़ावा मिलने लगा। आज एक लघु उद्योग स्थापित कर 20 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। यहां कुपोषित, छह साल के बच्चे और गर्भवती महिलाओं के लिए पुष्टाहार तैयार किया जाता है। इसकी आपूर्ति जनपद की आंगनबाड़ी केंद्रों में की जाती है।
द्रोपती ने बताया कि उनका परिवार आर्थिक रूप से ज्यादा समृद्ध नहीं था। वह स्वावलंबी बनना चाहती थीं। इसलिए 10-10 रुपये इकट्ठा कर महिलाओं का एक समूह बनाया और शुरुआती समय में छोटा-मोटा रोजगार शुरू किया। धीरे-धीरे उनके समूह में और महिलाएं जुड़ती गईं और उनका समूह बढ़ता गया। आज 20 महिलाएं तीन शिफ्ट में काम कर रही हैं। इस प्लांट में पुष्टाहार तैयार किया जाता है।
द्रोपती ने बताया कि उनके प्लांट में छह प्रकार के प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं। छह माह से तीन वर्ष के बच्चों के लिए आटा, बेसन और हलुआ। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए आटा, बेसन और मूंगदाल की खिचड़ी। कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओंं के लिए पुष्टाहार तैयार किया जाता है। इन पैकेटों को जनपद के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजा जाता है।
बातचीत
मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। तभी द्रोपती बहन से मुलाकात हुई। उन्होंने समूह से जुड़ने की सलाह दी। इसके बाद हम सभी ने प्रयास शुरू किए और प्रयास रंग लाया। आज मैं भी कमा रही हूं। - रानी
अन्य महिलाओं को काम करते देख मुझे भी रोजगार करने की इच्छा जागी और मैंने समूह में जुड़कर अपना योगदान शुरू कर दिया। हम सभी एकजुट होकर काम कर रहे हैं। आज मैं और मेरा परिवार खुश है। - अजब
समूह से जुड़ने के बाद धीरे-धीरे घर की समस्याओं का समाधान होने गया है। आज मैं प्रत्येक माह आठ हजार रुपये तक कमा लेती हूं। इस कमाई से मैं अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने में समर्थ हूं। - विनीता