- गली-मोहल्लों में खेलने को विवश हैं बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
एरच। खेल मैदान न होने से क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। जमीन का चयन होने के बाद भी खेल मैदान विकसित नहीं किया गया है। क्षेत्र में सेना व पुलिस में भर्ती होने के इच्छुक युवक सुबह-शाम को सड़कों के किनारे दौड़ लगाते दिखाई देते हैं। जबकि, सरकार ने खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए हर ग्राम पंचायत स्तर पर खेल मैदान व खेल उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, कई ग्राम पंचायत में तो खेल मैदान चिह्नित किए गए। कस्बे के युवाओं ने शासन- प्रशासन से कस्बे में दो एकड़ भूमि को चिह्नित कर उसमें स्टेडियम का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि कस्बा क्षेत्र की दम तोड़ रही प्रतिभाओं को संजीवनी मिल सके।
कस्बे में स्टेडियम न होने से कस्बा व क्षेत्र के युवाओं का खेल के प्रति रुझान कम हो रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र से प्रतिभा निखर कर ही देश का नाम रोशन करती हैं।- धर्मेंद्र कुमार बाजपेयी, स्थानीय निवासी
कस्बे में स्टेडियम न होने से युवा इधर- उधर खेलने को विवश हैं, उनको फुटबाॅल, हाॅकी, वालीबाॅल, किक्रेट आदि का प्रशिक्षण सही तरीके से नही मिल पा रहा है। इस कारण होनहार प्रतिभाएं निखर नहीं पा रही हैं। - रामकुमार पांचाल, समाजसेवी
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कस्बे में खेल मैदान के लिए भूमि सुरक्षित है, जमीन पर स्टेडियम का निर्माण कराने को नगर पंचायत द्वारा बोर्ड में प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा गया है। धनराशि मिलते ही स्टेडियम का निर्माण होगा। - जयचंद्र राजपूत, अध्यक्ष नगर पंचायत एरच