झांसी। मसालों का रंग सुर्ख करने के लिए उनमें सेहत के लिए हानिकारक रंग मिलाया जा रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) द्वारा की गई जांच में ये सामने आया है। मसाले के पांच नमूनों में रंग की मिलावट पाई गई है। इसके साथ ही एफडीए ने विक्रेताओं और निर्माताओं के खिलाफ मुकदमा दायर करने की तैयारी कर ली है। वहीं, पनीर भी गुणवत्ताविहीन पाया गया है।
पिछले एक साल के दरम्यान एफडीए ने खाद्य पदार्थों में बड़े पैमाने पर मिलावट पकड़ी है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि विभाग द्वारा कराई गई 239 नमूनों की जांच में से 118 में मिलावट पाई गई है। इसमें मसालों के भी पांच नमूने फेल हुए हैं। मिर्ची और हल्दी पाउडर के दो-दो तथा धनिया पाउडर के एक नमूने में केमिकल से बने सेहत के लिए हानिकारक रंग की मिलावट पाई गई है। घटिया किस्म के मसालों को अच्छी कीमत में बेचने के लिए निर्माताओं की ओर से रंग उनमें मिलाया गया था। इतना ही नहीं, पनीर के 16 नमूने भी फेल हुए हैं। पनीर में न्यूनतम पचास फीसदी फैट होना चाहिए, लेकिन जांच में बमुश्किल 20 से 30 फीसदी ही पाया गया है।
गुर्दे और लीवर को खराब करते हैं मसालों के रंग
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर (फिजिशियन) डा. जकी सिद्दीकी ने बताया कि मसालों में मिलाए जाने वाले केमिकलयुक्त रंग सेहत के लिए काफी नुकसानदायक होते हैं। ये गुर्दे और लीवर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा इनके लगातार सेवन से कैंसर तक का खतरा पैदा हो सकता है।
सेहत लिए हानिकारक पदार्थों की मिलावट पाए जाने पर सामान्य न्यायालय में मुकदमा दर्ज किया जाता है। मसालों के नमूने फेल होने पर संबंधित विक्रेता व निर्माता के खिलाफ वाद दायर होगा। इसमें सजा तक का प्रावधान है। इसके अलावा मिलावट के अन्य मामलों में एडीएम (वित्त एवं राजस्व) की अदालत में वाद दायर किया जाएगा।
- रवींद्र सिंह परमार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी