झांसी। रेलवे अब धीरे- धीरे उन स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहराव खत्म करेगा, जहां से उसे कमाई नहीं हो रही है। इससे ट्रेनों का संचालन तो सुधरेगा ही राजस्व की भी बचत होगी। इस नीति के तहत अभी तक शताब्दी एक्सप्रेस का धौलपुर व झांसी- लखनऊ इंटरसिटी का चिरगांव से ठहराव खत्म किया जा चुका है।
रेल मंडल में झांसी, ग्वालियर, मुरैना, दतिया, डबरा, बबीना, ललितपुर, बांदा, चित्रकूटधाम कर्वी, महोबा, मऊरानीपुर, उरई, भीमसेन प्रमुख स्टेशन हैं। वैसे मंडल में छोटे- बड़े 163 स्टेशन हैं। मंडल से प्रतिदिन 140 अप और डाउन ट्रेनें गुजरतीं हैं। नियमित ट्रेनों के संचालन के वक्त उक्त सभी स्टेशनों से प्रतिदिन एक लाख से अधिक मुसाफिर सफर करते थे, जिनसे करीब 30 करोड़ की आमदनी हर महीने रेलवे को होती थी। कोरोना महामारी के चलते रेलवे ने 23 मार्च से ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। इसके बाद 12 मई से राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों को स्पेशल गाड़ी बनाकर संचालन शुरू किया गया। एक जून से स्पेशल ट्रेनों की संख्या बढ़ा दी गई।
वर्तमान में अभी 60 से 70 फीसदी ही गाड़ियां चल रहीं हैं। चूंकि, ट्रेनों में सिर्फ कंफर्म टिकट के ही यात्री सफर कर रहे हैं। प्रतिदिन मुुश्किल से साढ़े तीन हजार से चार हजार यात्री ही सफर कर रहे हैं। जिनसे महीने में पांच से छह करोड़ रुपये ही आरक्षित टिकटों से मिल पा रहे हैं। मंडल को पिछले नौ महीने में साढ़े तीन अरब से अधिक का टिकटों से घाटा हो चुका है। इसमें कई स्टेशनों से रेलवे को कमाई नहीं हो रही है। रेलवे अब ऐसे स्टेशनों का ठहराव खत्म करने की तैयारी कर रहा है, जहां इक्का दुक्का यात्री सफर करने के लिए चढ़ रहे हैं।
- यात्रियों का ट्रैफिक न मिलने के कारण ही ऐसा निर्णय लेना पड़ता है। अभी जिन ट्रेनों के ठहराव खत्म किए, उससे संबंधित ट्रेनों का संचालन बेहतर हुआ है।
संदीप माथुर, मंडल रेल प्रबंधक।