उत्तर प्रदेश के झांसी में बुधवार को एक अनोखी तेरहवीं का आयोजन होगा। यह तेरहवीं किसी मनुष्य की नहीं, बल्कि एक बैल की होगी। इलाके में बैलों की दौड़ में कई इनाम जीतने वाले कबरी नाम के बैल की बीते 6 सितंबर को मौत हो गई थी। बैल के मालिक ने 18 सितंबर को बड़े पैमाने पर तेहरवीं करने का निर्णय लिया है।
उक्त बैल के मालिक सीपरी बाजार के लहरगिर्द गांव निवासी राजू दद्दा व जीतू दूध डेयरी का कारोबार करते हैं। वर्ष 2011 में उन्होंने एक बैल खरीदा था, जिसका नाम कबरी रखा। जिसे 2013 में बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता में शामिल किया गया। पहली ही बार में रिकॉर्ड बनाते हुए बैल ने प्रथम पुरस्कार हासिल कर कार जीता था। यहां से जीत का क्रम लगातार जारी रहा।
वर्ष 2014 में भी उसने बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता में कार व अन्य प्रतियोगिताओं में कई बाइकें जीतीं। दो साल तक भीतर प्रथम स्थान पाने के कारण इलाके में उसके नाम का डंका पिटने लगा। देखते ही देखते वह बुंदेलखंड में भी प्रसिद्ध हो गया।
लेकिन 6 सितंबर को शिवपुरी राजमार्ग पर ट्रक की टक्कर लगने से विजयी कबरी हमेशा के लिए खामोश हो गया। उसके निधन से सबसे ज्यादा धक्का उसके मालिक को लगा। इसके बाद उन्होंने आम इंसान की तरह 18 सितंबर को तेरहवीं करने का निर्णय लिया है। इसके लिए राजू दद्दा व जीतू ने बाकायदा कार्ड छपवाकर तीन हजार लोगों को निमंत्रण भेजा है।
इसमें बुंदेलखंड के कई जनप्रतिनिधि व अधिकारियों को भी बुलावा भेजा गया है। कबरी की मौत के बाद जोड़ीदार बैल खामोश मालिक ने बैल कबरी के साथ कल्ली नाम का बैल भी खरीदा था। दोनों की दोस्ती भी मिसाल बन गई थी। दोनों हमेशा एक साथ ही रहते थे। 6 सितंबर को उसकी मौत से उसका साथी कल्ली भी बेहद दुखी होकर खामोश है। जिसके चलते रिश्तेदार उसे अपने साथ ले गए हैं।