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बगैर प्लानिंग के हो रहे स्मार्ट सिटी के काम, हो रही धन की बर्बादी

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झांसी। स्मार्ट सिटी के तहत महानगर का विकास सुनियोजित ढंग से नहीं हो रहा है। मनमाने तरीके से काम हो रहे हैं। इससे लोगों की सहूलियतों में बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है। सरकारी पैसे की बर्बादी हो रही है। किले के परकोटे के अंदर के हिस्से पर तो बिलकुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 20-25 साल पहले जो यहां समस्याएं थीं, वो आज भी बरकरार हैं। यह कहना रहा मंगलवार को ‘अमर उजाला संवाद’ में आए अग्रवाल समाज के प्रबुद्धजनों का। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अग्रवाल समाज हमेशा से ही हर राजनीतिक दल की मदद करता आया है। आबादी में भी समाज का बड़ा हिस्सा है। बावजूद, समाज को राजनीति में समुचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। सर्वाधिक टैक्स देने और रोजगार के अवसर पैदा करने में आगे होने के बाद भी सरकार की ओर से समाज को कोई रियायतें नहीं दी जाती हैं। बल्कि, इस कारोबारी समाज को सरकारी तंत्र के भ्रष्टाचार का शिकार होना पड़ता है। इसके अलावा उन्होंने महानगर की कई समस्याएं भी उठाईं और समाधान के सुझाव भी रखे।
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अग्रवाल समाज अपने परिश्रम, शालीनता और संस्कारों के बल पर आगे बढ़ रहा है। इस प्रगति को कोई नहीं रोक सकता है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को भी इन्हीं संस्कारों के बूते पर आगे बढ़ाना होगा।
- डा. पीके अग्रवाल, रिटायर्ड आईएएस
सरकारी धन की बर्बादी पंचकुइयां इलाके में देखी जा सकती है। यहां अच्छी खासी सीसी सड़क उखाड़कर एपेक्स बिछा दिए गए हैं। कमोबेश पूरे शहर में यही हो रहा है।
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- डा. डीसी अग्रवाल
सड़कें चौड़ी किए बगैर स्मार्ट सिटी अधूरी है। यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए जगह-जगह वाहन पार्किंग के भी इंतजाम करने होंगे। नालों की नियमित सफाई के इंतजाम भी किए जाने चाहिए।
- ओमप्रकाश अग्रवाल बाबा
नटवली नाले के जरिये पुराने शहर के ज्यादातर गंदे पानी की निकासी होती है। लेकिन, इसकी तली तक सफाई 25 साल से नहीं की गई है। इतना ही नहीं, नाले के ऊपर अतिक्रमण भी बढ़ रहा है।
- मुकेश अग्रवाल, पूर्व पार्षद
अतिक्रमण की वजह से बड़ाबाजार से पैदल निकलना भी दूभर होता है। आबादी बढ़ने की वजह से अब ज्यादा चौड़े रास्तों की जरूरत है, लेकिन अतिक्रमण से सड़कें और भी संकरी होती जा रही हैं।
- संजीव अग्रवाल लाला
अतिक्रमण की वजह से मिशन कंपाउंड की सड़कें लगातार सिकुड़ती जा रही हैं। आवागमन में परेशान होती है। जाम भी लगता है। बावजूद, इसके समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
- सुरेश चंद्र अग्रवाल
स्मार्ट सिटी के काम बगैर प्लानिंग के हो रहे हैं। जनता को लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। कहीं एक काम नहीं हुआ, तो कहीं एक ही स्थान पर तीन-तीन शौचालय बना दिए गए हैं।
- संजय अग्रवाल
काम कम और दिखावा ज्यादा हो रहा है। ग्वालियर रोड पर ओवरब्रिज तक नहीं बनाया गया है। लोगों को घंटों जाम से जूझना पड़ता है। काम प्रभावित होते हैं। बावजूद, ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
- संजीव अग्रवाल
मानिक चौक और कोतवाली की ढाल पर सालों से रोजाना जाम लगता आ रहा है। व्यापारी और ग्राहक सभी परेशान होते हैं। इसके बाद भी यहां यातायात नियंत्रण के उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
- राजकुमार अग्रवाल ‘बंटी’
बाहर से तो झांसी चमकती नजर आती है, लेकिन अंदर बदहाली देखने को मिलती है। जबकि, काम महानगर के समग्र विकास की भावना से होने चाहिए। इसके लिए विशेष योजना बनाई जानी चाहिए।
- विवेक अग्रवाल
व्यावसायिक विकास के नाम पर सिर्फ बड़े उद्यमियों पर ही ध्यान दिया जाता है। छोटे कारोबारियों को सरकार की ओर से मदद हासिल नहीं हो पाती है। छोटे कारोबारियों को भी रियायतें मिलनी चाहिए।
- अनुज अग्रवाल
स्कूलों की छुट्टी होने पर सड़कों पर जगह-जगह जाम लग जाता है। पुलिस भी ये देखती रहती है, लेकिन कभी जाम खुलवाने के लिए आगे नहीं आती है। लोगों को खुद ही जूझना पड़ता है।
- प्रवीण अग्रवाल ‘बिट्टू’
वीआईपी जहां भी जाते हैं, उस क्षेत्र का विकास हो जाता है। ये अच्छी बात भी है। लेकिन, कभी वीआईपी को शहर के भीतर भी आना चाहिए, जिससे यहां की भी तस्वीर बदल जाए।
- ओमप्रकाश अग्रवाल मुड़िया
राजनीतिक प्रतिनिधित्व हासिल करने के लिए समाज को एकजुट होना होगा। नेताओं को हमें अपनी ताकत का अहसास कराना होगा। इसके लिए सभी को संगठित होकर आगे आना होगा।
- राजेंद्र अग्रवाल
देश के विकास में अग्रवाल समाज का हमेशा से ही बड़ा योगदान रहा है। बावजूद, अहमियत कभी नहीं दी गई, हमेशा हाशिये पर ही रखा गया। लेकिन, अब आज की पीढ़ी बदलाव चाहती है।
- संजय अग्रवाल
पुलिस निरंकुश हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि हमारे चुने हुए प्रतिनिधि सही ढंग से अपनी जिम्मेदारी का पालन नहीं कर रहे हैं। विकास के लिए उन्हें अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
- प्रेमप्रकाश अग्रवाल
जनप्रतिनिधियों में आत्मविश्वास की कमी है। यही वजह है कि झांसी को कमिश्नरी जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ध्यानचंद की धरती होने के बाद भी झांसी में खेल सुविधाओं का अभाव है।
- अतुल अग्रवाल किलपन
व्यापारी वर्ग को कोरोना वायरस के संक्रमण की गहरी मार पड़ी है। अग्रवाल समाज के लोग भी बड़ी संख्या में इस महामारी की चपेट में आए। ऐसे परिवारों को पर्याप्त मदद नहीं मिल पाई।
- मुकेश सिंघल
बड़े व्यापारी आगे बढ़ते जा रहे हैं, जबकि छोटे कारोबारी लगातार पिछड़ रहे हैं। ये विसंगति भविष्य के लिए ठीक नहीं है। इसके अलावा दवा कारोबार मुनाफाखोरी से मुक्त कराना चाहिए।
- प्रमोद अग्रवाल
सदर बाजार भी महानगर का हिस्सा है, वहां भी पिंक टॉयलेट बनना चाहए। इसके अलावा सदर बाजार की सड़कें भी बेहद दुर्दशाग्रस्त है। व्यवस्थाएं बेहतर बनाने की जरूरत है।
- पंकज गर्ग
बनने के सालों बाद भी बड़ागांव गेट मुक्तिधाम पर बना शवदाह गृह शुरू नहीं हो पाया है। ये कंडम हो चला है। अब ढाई करोड़ से दो और बनाने की योजना है। ये सरासर धन की बर्बादी है।
- कुलदीप सिंघल
हथ ठेले सड़क से सटकर खड़े होने लगे हैं। इससे सड़कों का आवागमन बाधित होता है। रोजगार की दृष्टि से ठेले भले ही न हटाएं जाएं, लेकिन उन्हें सड़क से दूर लगाया जाए।
- कैलाश अग्रवाल
झांसी विकास प्राधिकरण कॉलोनी बनाने के बाद उस पर ध्यान नहीं देता। न नालियों की सफाई होती है और न ही सड़कों की मरम्मत। लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
- कृष्णकांत अग्रवाल
बाजारों में पार्किंग तक का बंदोबस्त नहीं है। जबकि, मल्टी लेवल पार्किंग बनाई जानी चाहिए। इसके अलावा रानी महल के इर्दगिर्द अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। पर्यटक भी आने से कतराते हैं।
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- सूर्यप्रकाश अग्रवाल
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