झांसी। ब्लॉक प्रमुख पद के लिए अधिसूचना जारी होने के साथ ही झांसी के सभी आठ ब्लॉकों में सियासी हलचल तेज हो गई। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत के बाद जहां भाजपा के हौसले बुलंद हैं वहीं, सपा इन चुनावों से अपनी वापसी करने की पूरी कोशिश में है। चुनावी तिथि के एलान के बाद दोनों दलों में समर्थन के लिए उम्मीदवारों की गणेश परिक्रमा आरंभ हो गई। अपने-अपने नेताओं के माध्यम से समर्थन के लिए उम्मीदवार लामबंदी में जुटे रहे। देर-रात पार्टी के स्थानीय नेताओं के बीच बैठकों का दौर चलता रहा हालांकि दोनोें ही पार्टियों ने आज किसी के भी नाम पर मुहर नहीं लगाई।
उधर, पार्टी स्तर पर समर्थन जुटाने के अलावा उम्मीदवार बीडीसी सदस्यों को अपने पाले में जुटाने में भी जी-जान से जुटे हुए हैं। बबीना, चिरगांव, मऊरानीपुर एवं मोंठ ब्लॉक में जोरदार मुकाबले की उम्मीद है। एक-एक बीडीसी सदस्य को अपने पाले में जुटाने के लिए तगड़ी लामबंदी चल रही है। जीतने को कई उम्मीदवारों ने थैली का मुंह खोल दिया है। बताया जा रहा उम्मीदवार पैसा देने के साथ ही बीडीसी सदस्यों के विजयी सर्टिफिकेट भी अपने पास रख रहे हैं। चिरगांव के एक उम्मीदवार ने कई बीडीसी सदस्यों को गुमनाम जगह भेज दिया है।
मऊरानीपुर
आरक्षण- सामान्य
बीडीसी सदस्यों की संख्या-85
मऊरानीपुर ब्लॉक प्रमुख की सीट सामान्य होने के नाते इस बारे यहां तगड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। पिछली बार यह सीट सपा के पास थी। भाजपा की पूरी कोशिश अपने समर्थक को कुर्सी दिलाने की है। इसी सीट पर पूर्व विधायक रश्मि आर्या एवं मौजूदा विधायक बिहारीलाल आर्या के बीच पिछले काफी समय से चल रही राजनीतिक लड़ाई अब प्रतिष्ठा की लड़ाई में तब्दील हो चुकी है।
बंगरा-
आरक्षण- अनुसूचित जाति स्त्री
सदस्यों की संख्या- 82
बंगरा सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित की गई है। महिला सीट होने की यहां की लड़ाई अभी पर्दे के पीछे ही चल रही है। भाजपा से तीन एवं सपा से दो उम्मीदवार मैदान में बताए जा रहे हैं। अभी फिलहाल उम्मीदवार अपने दल से समर्थन के लिए लामबंदी में जुटे हैं।
बबीना
आरक्षण- पिछड़ा वर्ग
सदस्यों की संख्या- 82
ब्लॉक प्रमुख सीट पर सर्वाधिक रोचक लड़ाई इसी सीट पर अभी तक दिखाई पड़ रही थी। पूर्व ब्लॉक प्रमुख चरण सिंह एवं उनके पुत्र राज यादव मजबूत दावेदारों में गिने जा रहे लेकिन, राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चा पर यकीन करें तब यहां सबसे अधिक उलटफेर की गुजाइंश दिखाई पड़ रही है। विधायक के सियासी कदम पर भी यहां की जीत हार तय होगी।
मोंठ-
आरक्षण- अनुसूचित जाति
सदस्यों की संख्या- 80
जनपद की सियासी दुनिया में मोंठ का चुनाव हमेशा से दिलचस्प रहा है। मोंठ को अभी तक सपा का गढ़ माना जाता रहा लेकिन, इस बार सीट के अनुसूचित जाति को आरक्षित हो जाने से उसको तगड़ी चुनौती झेलनी पड़ेगी। पूर्व विधायक दीपनारायण एवं भाजपा विधायक जवाहर लाल राजपूत की राजनीतिक हैसियत भी काफी कुछ इस चुनाव से तय होगी।
बड़ागांव
आरक्षण- पिछड़ा वर्ग महिला
सदस्यों की संख्या- 56
सबसे कम बीडीसी सदस्य इसी ब्लॉक में हैं। पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए सीट रिजर्व हो जाने से भाजपा के कई दिग्गज मैदान से बाहर हो गए हैं। पार्टी का समर्थन पाने के लिए अभी यहां उम्मीदवार अपने नेताओं की गणेश परिक्रमा में जुटे हैं।
चिरगांव
आरक्षण- सामान्य
सदस्यों की संख्या- 73
चिरगांव की सीट इसके सपा के पास थी लेकिन, इस बार भाजपा ने सीट हथियाने के लिए पूरा जोर लगाया हुआ है। पार्टी की ओर से उम्मीदवार पूरी कोशिश में जुटे हुए हैं।
गुरसराय
आरक्षण- महिला
सदस्यों की संख्या- 71
गुरसराय ब्लॉक की सीट इस बार महिला वर्ग को आरक्षित होने के चलते यहां भी स्थानीय सियासी सूरमाओं को झटका लगा है। इस सीट पर भाजपा से सबसे अधिक दावेदार बताए जा रहे हैं। सपा यहां से तगड़ी चुनौती देने की तैयारी में है।
बामौर
आरक्षण- अनुसूचित जाति
सदस्यों की संख्या- 70
यहां पर ब्लॉक प्रमुख की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई है। पिछली बार यह सीट सपा के खाते में थी लेकिन, इस सीट को छिनने की भाजपा ने पूरी तैयारी की हुई है।
जिला स्तर से नाम पैनल बनाकर भेजे जा चुके हैं। एक-दो दिन के भीतर नाम घोषित कर दिए जाएंगे
जमुना कुशवाहा, भाजपा जिलाध्यक्ष
सभी ब्लॉकों से नाम एकत्रित कर लिए गए हैं। संभावना है कि अगले चौबीस घंटे के भीतर घोषित कर दिए जाएंगे।
निवर्तमान महेश कश्यप, निवर्तमान जिलाध्यक्ष, सपा
आठ को नामांकन, दस को मतदान
चुनाव आयोग से जारी अधिसूचना के मुताबिक 8 जुलाई को नामांकन दाखिल होगा। नौ को स्कूटनी होने के साथ ही दोपहर तीन बजे तक नाम वापसी की जा सकेगी। दस जुलाई को सुबह ग्यारह बजे से दोपहर तीन बजे तक मतदान होगा। मतदान के बाद ही मतगणना भी आरंभ करा दी जाएगी। इसके साथ ही परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे।