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सीपरी ओवरब्रिज का ठेका हुआ, काम शुरू होगा चार माह बाद

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सीपरी बाजार ओवरब्रिज जल्द होगा अधूरा पडा काम। अमर उजाला
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सीपरी ओवरब्रिज का ठेका हुआ, काम शुरू होगा चार माह बाद
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झांसी। रेलवे ने सीपरी बाजार ओवरब्रिज के अधूरे काम को पूरा करने के लिए दिल्ली की गैलविनो कंपनी का टेंडर स्वीकृत कर दिया है। इस कंपनी का खुद का वर्कशॉप है, जिसमें गार्डर बनाने का काम होगा। कंपनी गार्डर के लोहे के लिए सेल को ऑर्डर देने का जा रही है। लोहा मिलते ही गार्डर बनाने का काम शुरू हो होगा। गार्डर बनकर आने में कम से कम चार महीने लगेंगे। इसके बाद ही काम शुरू हो सकेगा। यानी लोगों को अभी और समस्याएं झेलनी होंगी।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज के अधूरे काम को पूरा करने के लिए दो महीने पहले दूसरी बार टेंडर डाले गए थे। इस बार नई दिल्ली की गैलविनो व क्रिटिव कंपनी ने टेंडर डाले थे। टेंडरों की तकनीकी व वित्तीय जांच के बाद काम का जिम्मा गैलविनो कंपनी को सौंप दिया गया है। रेलवे ने कंपनी के साथ कागजी अनुबंध की कार्यवाही पूरी कर ली है। कंपनी को अधूरा काम 10.50 करोड़ रुपये में पूरा करना है। कंपनी गार्डर बनाने के लिए सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) से लोहा लेने जा रही है। लोहा मिलने के बाद कंपनी खुद के वर्कशॉप में गार्डर बनवाएगी। इससे सीपरी बाजार ओवरब्रिज के अधूरे काम के शुरू होने की उम्मीद जाग गई है। ओवरब्रिज निर्माण पूरा न होने से लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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मालूम हो कि प्रदेश सरकार ने 2012 में ओवरब्रिज निर्माण को स्वीकृति दी थी। राज्य सेतु निगम अपने हिस्से का काम 2016 में पूरा कर चुका है, जबकि रेलवे अपने हिस्से का काम पिछले तीन साल से कर रहा है। शुरूआत में रेलवे ने दिल्ली की मैक्स आउट इंफ्रा स्ट्रक्चर कंपनी को ठेका दे रखा था। कंपनी को 22 करोड़ के काम को दो साल में पूरा करके देना था। मगर, कंपनी पौने तीन साल में अपने हिस्से का 55 फीसदी ही काम पूरा कर सकी थी।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज के अधूरे काम को पूरा कराने के लिए दिल्ली की कंपनी को टेंडर आवंटित कर दिया है। जल्द ही कंपनी धरातल पर काम शुरू करेगी।
जनसंपर्क अधिकारी।
ये भी जानिए
सीपरी बाजार ओवरब्रिज का पिछले सवा साल से गार्डर न मिलने के कारण काम लटका है। पिछली कंपनी बार-बार कहती रही कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड से लोहा न मिलने के कारण गार्डर नहीं बन पा रहे हैं। यहां के लिए उत्तराखंड के काशीपुर से गार्डर बनकर आने हैं। वहीं, तीसरी रेल लाइन के बीच आ रहे पुलों के लिए गार्डर बराबर मिल रहे हैं। इस पर निर्माण शाखा के अफसरों को शंका होने पर कंपनी की कार्य प्रणाली की जांच करवाई थी। जांच में पता लगा कि कंपनी ने सेल में पैसा ही जमा नहीं किया, इससे गार्डर नहीं मिल पा रहे हैं। रेल प्रशासन को धोखे में रखने पर जुलाई में कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया गया था। बाकी काम के लिए नए सिरे से दूसरी बाद टेंडर मांगे गए थे। पहली बार में किसी भी कंपनी ने टेंडर नहीं डाला था।
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ये काम बाकी
अभी पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। गार्डर आने के बाद पहले सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम होना है। इसके बाद एक साथ 50 और 36 मीटरों के गार्डर के बीच शटरिंग लगाने, सरिया बांधने और सड़क बनाने का काम होगा।
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