झांसी। एक समय था जब भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। सोना चांदी यहां के लोगों के लिए कोई मायने ही नहीं रखता था। इसकी मिसाल भी लगातार सामने आ रही है। आजादी के बाद से ही बुंदेलखंड की धरती से लगातार सोना और चांदी निकल रहा है। पुरातत्व विभाग के रिकार्ड के अनुसार समूचे बुंदेलखंड में अब तक करीब एक अरब से अधिक लागत का सोना, चांदी के साथ ही अष्ट धातु की मूर्तियां जमीनों से निकल चुकी हैं। जो विभिन्न्न थानों के साथ ही कोषागारों में जमा हैं।
हमीरपुर शहर के साथ ही हमीरपुर के जरिया में खुदाई के दौरान कई बार चंदेल काल के सोने के सिक्के जमीन से निकले हैं। वहीं महोबा के लालेट में चंदेल काल के 100 से अधिक चांदी के सिक्के निकले हैं। झांसी शहर के अलीगोल इलाके में एक स्थानीय मकान का निर्माण करते समय मकान की नींव से मुगल काल के सैकड़ों चांदी के सिक्के निकले थे। सिक्कों की खबर इलाके में पहुंचते ही स्थानीय लोगों में लूटमार की स्थिति पैदा हो गई थी। आलम यह था कि जिसके हाथ जितने सिक्के लगे वह उसे लेकर नदारद हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस और पुरातत्व विभाग की टीम ने 501 चांदी के सिक्के बरामद कर कोषागार में जमा करवाए थे। बंगरा के पास स्थित गेरहा में भी खुदाई के दौरान 200 से अधिक चांदी के सिक्के निकले । एरच के ग्राम अवक में मुगल काल के 500 से अधिक चांदी के सिक्कों को बरामद किया गया था। वहीं मऊरानीपुर में पहले कई बार सोने, चांदी के सिक्कों के साथ ही अष्टधातु की मूर्तियां भी जमीन से निकली हैं। सोमवार को भी रानीपुर के लुहार गांव में पानी की पाइपलाइन डालते समय ब्रिटिश काल के सिक्के जमीन से निकले हैं। इसके अलावा कई बुंदेलखंड की कई जगहों पर जमीन से सोना निकला है।
पहले के जमाने में बैंक नहीं होते थे तक लोग धन को घरों में ही दबाकर रखते थे। अकाल अथवा मृत्यु हो जाने पर पर धन जमीनों में ही दबा रह गया जो जब तब खुदाई के दौरान निकल रहा है।
एसके दुबे, उपनिदेशक राजकीय संग्रहालय