झांसी। भ्रष्टाचार में फंसे सिंचाई विभाग के निलंबित अधिशासी अभियंता संजय कुमार को शासन ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। उन्होंने दो साल पहले अपने कार्यकाल में बगैर काम कराए छह फर्मों को 77, 41,130 रुपये का भुगतान कर दिया था। नहरों की सफाई के नाम पर जमकर खेल खेला गया था।
सिंचाई विभाग के झांसी प्रखंड में बेतवा नहर सबसे बड़ी है। रबी सीजन 2019 में इस नहर की सिल्ट सफाई, मरम्मत और खुदाई का काम होना था। कागजों में ये काम पूरा होना दर्शाया गया और इसके एवज में अलग-अलग फर्मों को 77, 41,130 रुपये का भुगतान किया गया। उस समय अधिशासी अभियंता संजय कुमार थे। उनका तबादला होने के बाद पड़ताल शुरू हुई, जिसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया। यहां तक कि अधिशासी अभियंता ने फर्मों के साथ कांट्रेक्ट तक नहीं किया था। दस्तावेजों में काम की कोई रसीद भी नहीं पाई गई। मामला शासन स्तर तक पहुंचा। जांच शुरू हुई। उनको निलंबित कर दिया गया। अधिशासी अभियंता ने अपने बचाव में काफी प्रयास किए, लेकिन उनकी चल नहीं पाई। शासन ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए अधिशासी अभियंता को बर्खास्त कर दिया है। इतना ही नहंी, उक्त रकम की वसूली के आदेश भी जारी किए हैं।
जमकर हुआ था बंदरबांट
झांसी। अधिशासी अभियंता और ठेकेदारों की गठजोड़ से सरकारी पैसे का जमकर बंदरबांट हुआ था। एक अक्तूबर 2019 को मां कामाक्षी सप्लायर को 9.99 लाख, 26 सितंबर 2019 को शब्द कंस्ट्रक्शन को 46.53 लाख, चार नवंबर 2019 को अनुज कंस्ट्रक्शन को 4.98 लाख, चार दिसंबर 2019 को रोहित कंस्ट्रक्शन को 5.90 लाख, जेपी इंटरप्राइजेज को 5.90 लाख और बाबू प्रसाद तिवारी फर्म को 4.10 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।