मल्हार और पारसमणि फिल्मों के हिट गीतों ने इंदीवर के पास संगीत निर्देशक व निर्माताओं की लाइन लगा दी। इंदीवर अपने घर बरुआसागर वापस आए और अपनी पत्नी पार्वती (पारो) से कहा कि अब वह उनके साथ चलकर मुंबई में ही रहें। पर, कहानी में एक बार फिर मोड़ आया, पारो ने बुंदेलखंड की सरजमीं छोड़कर मुंबई जाने से साफ इंकार कर दिया। लाख कोशिशों के बाद भी इंदीवर को अकेले ही मुंबई वापस जाना पड़ा।
इसके बाद उन्होंने जो गीत लिखे उसमें निर्माता या श्रोता भले ही उनके निजी जिंदगी के दर्द को न समझ सके हो पर बुंदेलखंड की धरती के लोग भली भांति जानते थे कि इंदीवर के इन गीतों में पार्वती की जुदाई की कसक है। उस दौर के गीतों में फिल्म हिमालय की गोद का गीत , एक तू न मिला सारी दुनिया मिली भी तो क्या है, मेरा दिल न खिला सारी बगिया खिली भी तो क्या है, फिल्म सफर का गीत, हम थे जिनके सहारे वो हुए न हमारे, डूबी जब दिल की नैया सामने थे किनारे जैसे दर्द भरे गीत इंदीवर की कलम से लिखे जाते रहे।
फिल्मी आकाश पर इंदीवर ने धूम मचा दी। एक बार फिर वे अपनी पार्वती को मनाने बरुआसागर आए और उन्होंने पारों को साथ ले जाने की कोशिश की पर वे नाकाम रहे। इसके बाद फिल्म सरस्वती चंद का वह गीत, छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए, प्यार से भी जरूरी कई काम हैं, प्यार सब कुछ नहीं जिंदगी के लिए। शायद इंदीवर ने यह गीत अपने टूटे हुए दिल को दिलासा देने के लिए ही लिखा था। इसके बाद, जीवन से भरीं तेरी आंखें मजबूर करें जीने के लिए तथा पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले झूठा ही सही, कसमें वादे प्यार वफा बातें हैं बातों का क्या जैसे गीत भी सामने आए।