झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति/राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की बात हो रही है, ऐसे समय में जरूरी है कि डिजिटल गतिविधियों के अधिक प्रचार के लिए तकनीक को उपयोगकर्ता के लिए सरल और सुविधा संपन्न बनाया जाए। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भाषा, सभ्यता, संस्कृति, सामाजिक मूल्यों को समुचित महत्व मिला है। इसका विजन भारतीय विश्वविद्यालयों के लिए नए आयाम स्थापित करने का अवसर है। उन्होंने यह बात ऑनलाइन संबोधन के दौरान कही। खराब मौसम की वजह से वह कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर सकीं।
कुलाधिपति ने कहा कि मौजूदा परिपाटियों से आगे बढ़कर जनता, कौशल और हमारी मूल क्षमताओं का किस प्रकार सर्वश्रेष्ठ उपयोग किया जाए, इस पर विचार होना चाहिए। विश्वविद्यालय समाज के लिए प्रासंगिक सामाजिक समस्याओं पर शोध को बढ़ावा दें। मानव जाति के लिए जलवायु परिवर्तन से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान खोजा जाए। साथ ही जरूरत इस बात की है कि ऐसी जीवनशैली के मॉडल्स के बारे में भी सोचा जाए, जो आसानी से सुलभ हों। उसमें गरीबों, सबसे कमजोर लोगों के साथ ही साथ हमारे पर्यावरण की देखरेख को प्रमुखता हो। अत: शिक्षाविदों, अनुदान संस्थाओं, नीतिज्ञों, मानवतावादियों और समाज का उत्तरदायित्व है कि वास्तविक रूप में देश के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, तकनीकी प्रगति और विकास के लिए शिक्षण में सांस्कृतिक और मानव मूल्यों का समावेश सुनिश्चित करें। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीयू के पूर्व कुलपति और अंतर विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र नई दिल्ली के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने कहा कि विश्व की कई दिग्गज कंपनियों के सीईओ भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली का ही अंग हैं। छात्रों को सीख देते हुए कहा कि उत्कृष्टता पर पहुंचने के लिए लगन और सत्यनिष्ठा जरूरी है। इस दौरान उन्होंने और कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने मेधावियों को कुलाधिपति पदक बांटे।