फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्कूल डाल रहे ‘डाका’, हाथ पर हाथ धरे बैठा शिक्षा विभाग

Wed, 03 Apr 2019 01:21 AM IST
देवेंद्र कुमार अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
school, jhansi news - फोटो : demo
विज्ञापन
नया सत्र शुरू हो गया है। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले शहर के छोटे-बड़े कई स्कूल खुलेआम अभिभावकों की जेबों पर ‘डाका’ डाल रहे हैं। कहीं एडमिशन के नाम पर, कहीं महंगी ट्यूशन फीस वसूल कर। कई स्कूलों ने ट्यूशन फीस तो ज्यादा नहीं रखी है पर एक्टिविटी, कंप्यूटर, एनुअल (वार्षिक) या विभिन्न अन्य मदों में मोटी रकम वसूल रहे हैं। स्कूलों द्वारा दोहन का सिलसिला यहीं नहीं रुक रहा। तय दुकानों पर महंगी किताबों के साथ ही काफी महंगी यूनिफार्म, टाई-बेल्ट-जूते खरीदना भी मजबूरी है। इन सब से बेखबर शुल्क नियामक समिति हाथ पर हाथ धरे बैठी है। शिक्षा विभाग के अधिकारी दोषी स्कूलों पर सख्ती और कार्रवाई का रटारटाया बयान दे रहे हैं। जबकि ज्यादातर अभिभावक जेब ढीली कर चुके हैं। भले ही उन्होंने यह उधार लेकर क्यों न किया हो।  
विज्ञापन


 हर साल नए शैक्षिक सत्र में केंद्र व राज्य सरकार की ओर से अभिभावकों को राहत देने के लिए कई दिशा निर्देश जारी किए जाते हैं। लेकिन इनका लाभ जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण कभी अभिभावकों को नहीं मिला। बीते शैक्षिक सत्र में सभी वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालय, सीबीएसई व आईसीएसई और उनसे मान्यता प्राप्त विद्यालयों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए जिला नियामक शुल्क समिति का गठन हुआ था। लेकिन वर्तमान सत्र में हाल यह है कि समिति के निर्देशों का अधिकांश स्कूलों ने पालन नहीं किया। किसी स्कूल ने न तो फीस बढ़ोत्तरी के लिए आवेदन समिति के समक्ष किया और न ही विभाग की वेबसाइट पर अपनी फीस तथा अन्य सूचनाएं अपलोड़ की। निजी प्रकाशनों की पुस्तकें भी स्कूल - कालेजों द्वारा पढ़ाई जा रही हैं। हॉल यह है कि नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। लेकिन अभी तक समिति ने इन स्कूल - कालेजों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों के साथ बैठक भी नहीं की है।

बाक्स
यह है फीस बढ़ाने का नियम  
प्राइवेट स्कूलों द्वारा बढ़ाई जा रही मनमानी फीस पर लगाम लग सके इसके लिए बीते वर्ष प्रदेश सरकार ने स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय विधेयक के मसौदे क ो मंजूरी दी थी। इसमें फीस बढ़ाने का जो फार्मूला तय किया गया था, उससे अधिकतम 5 से 7 फीसदी फीस ही बढ़ सक ती है। इसमें फीस बढ़ाने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) को मानक बनाया गया है। इसमें पांच फीसदी जोड़ने पर जो योग आएगा, उससे ज्यादा फीस नहीं बढ़ सकेगी। वर्तमान में कई निजी स्कूल 15 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ा चुके हैं। जानकारी के अनुसार प्राइवेट स्कूल पूरी फीस भी एकमुश्त नहीं ले सकते हैं।
विज्ञापन


बाक्स
बेटी की शिक्षा है नि:शुल्क
अगर आपकी बेटी है, तो उसे नि:शुल्क शिक्षा का भी प्रावधान है। सीबीएसई के निर्देशानुसार परिवार में एक बेटी है, तो निशुल्क शिक्षा उसे प्रदान की जाएगी। जबकि दूसरी की फीस सिर्फ 50 फीसदी ही स्कूल ले सकते हैं। सीबीएसई ने बेटी पढ़ाओ - बेटी बढ़ाओ अभियान के तहत यह निर्देश जारी किए हुए हैं, जो उसकी विभागीय वेबसाइट पर भी अपलोड़ है।
 
यह है जिला नियामक शुल्क समिति के प्रमुख निर्देश
----------------------------------
1 - सभी विद्यालयों को शुल्क विवरण जिले की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा और अपने सूचना पट पर भी चस्पा करना होगा।
2 - विद्यालय द्वारा कोई भी कैपिटेशन शुल्क  नहीं लिया जाएगा।
3 - प्रत्येक शुल्क या प्रभार के लिए रसीद देनी होगी।
4 - विद्यालय द्वारा पांच वर्ष से पहले यूनीफार्म में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।
5 - विद्यालय में वाणिज्यिक क्रिया कलाप से होने वाली आय विद्यालय के खाते में जमा की जाए।
6 - किसी भी फीस शुल्क की वृद्धि जिला शुल्क नियामक समिति क ी सहमति के बिना नहीं की जाएगी।
7 - पिछले वर्ष की तुलना में शुल्क वृद्धि पांच प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
8 - छात्रों को पुस्तकें, जूते, यूनिफार्म आदि किसी विशिष्ट दुकान से क्रय करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।



मुख्यमंत्री के पोर्टल पर दर्ज हुईं शिकायतें
प्राइवेट स्कूलों द्वारा की गई फीस बढ़ोत्तरी और निजी प्रकाशनों की पुस्तकों की खरीद पर बनाए जा रहे दबाव को लेकर कई अभिभावकों ने झांसी के जिला शुल्क नियामक समिति की जगह मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायतें दर्ज करना ठीक समझा। यही वजह है कि संयुक्त शिक्षा निदेशक झांसी ने झांसी के जिला विद्यालय निरीक्षक व अन्य जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों को जांच करने के निर्देश दिए और जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा है। इधर, जिला विद्यालय निरीक्षक डा. नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि कोई भी निजी प्रकाशनों की पुस्तके ं खरीदने को बाध्य नहीं कर सकता है। एनसीईआरटी की पुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी। समिति के निर्देशों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की जाएगी।


क्यों हमारी समस्या मुद्दा नहीं बनाते प्रत्याशी
 कई अभिभावकों का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान दौर में अंग्रेजी माध्यम प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना अब काफी कठिन हो गया है। फीस भी काफी बढ़ गई और कोर्स भी दो हजार रुपये से कम का नहीं आ रहा है। इन अभिभावकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दे छोडे़ं और उनकी इस समस्या को समझें। कई अभिभावकों ने कहा कि आम परिवारों के बच्चों को केंद्रीय विद्यालयों में भी जगह मिले, जिस तरह से सरकारी कर्मचारी के बच्चों को प्राप्त होता है।

कक्षा तीन में बच्चे का प्रवेश कराया है। अभी तक 11 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। यूनिफार्म खरीदना बाकी रह गया है।
दीपक कुमार निवासी नंदनपुरा

हर साल प्रवेश फीस बढ़ती है। इस पर किसी का नियंत्रण नहीं है। यह समस्या कभी चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बनता है।
प्रशांत दीक्षित निवासी आईटीआई क्षेत्र

मेरा एक बच्चा कक्षा चार व एक कक्षा पांच में पढ़ता है। पढ़ाई काफी महंगी है। गरीब परिवार तो अपने बच्चों को पढ़ा ही नहीं सकते हैं।
परवेज निवासी सैंयर गेट  

केंद्रीय विद्यालय में अपने बच्चे के प्रवेश के लिए पिछले वर्ष भी भटका था। इस बार भी प्रवेश नहीं मिला। यह आम परिवारों के साथ भेदभाव है।
विजय निवासी खुशीपुरा

निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ हम अपनी आवाज भी उठाना चाहें, तो सुनने वाला कोई नहीं है। सभी की मिलीभगत है और भ्रष्टाचार है।
प्रियंका जैन निवासी मानिक चौक

सरकार द्वारा स्कूलों पर नकेल कसने का कई बार फरमान जारी किया जाता है। लेकिन वह खुद ही कार्रवाई करना भूल जाता है। इसका फायदा प्राइवेट स्कूल उठाते हैं।
रेनू रावल निवासी मानिक चौक

कापी - किताबों के रेट
वर्ष 2018 में प्री प्राइमरी की 1500 से 2500 रुपये तक, कक्षा एक से पांच तक की 2500 रुपये से 3000 रुपये तक, छह से आठ तक की 3000, से 4500 रुपये तक, कक्षा नौ से 10 तक की 5000 रुपये से 6000 रुपये तक थी। जबकि वर्तमान शैक्षिक सत्र में यह किताबें प्री प्राइमरी की 3500 तक, कक्षा एक से पांच तक 4500 तक, छह से आठ तक 5000 रुपये तक और नौ से दस तक 7000 रुपये तक मिल रही हैं। इसी प्रकार से यूनिफार्म, स्कूल शूज के दाम भी बढ़ गए हैं।

20 प्रतिशत तक बढ़ी फीस
वर्तमान शैक्षिक सत्र में कक्षा एक की फीस 600 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक, कक्षा दो की 750 रुपये से लेकर 1800 रुपये तक, कक्षा तीन की 850 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक, कक्षा 4 की एक हजार रुपये से लेकर 2500 रुपये तक और कक्षा पांच की 1100 रुपये से लेकर 2800 रुपये तक है। जबकि कक्षा छह में त्रैमासिक 8 हजार रुपये, सात में 9000 हजार रुपये, आठ में 10 हजार रुपये तक है। इसके अलावा वर्तमान में यूनिफार्म 700 रुपये से 1500 रुपये तक है। जूते भी 300 रुपये से 1000 रुपये तक की रेंज मेें हैं। अभिभावकों के अनुसार फीस में 15 से 20 प्रतिशत बढ़ोत्तरी इस साल हुई है। कोर्स और यूनिफार्म निश्चित दुकानों पर ही प्राप्त होती हैं। इनमें स्पोर्ट्स ड्रेस भी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें