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छात्रवृत्ति के इंतजार में साठ हजार छात्र

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झांसी। विभिन्न वर्ग के करीब साठ हजार छात्रों के बीच वितरित होने वाली छात्रवृत्ति अधर में फंस गई है। जनपद को आवंटित होने वाला बजट भी अब तक तय नहीं हो सका है। आशंका जताई जा रही कि इस वर्ष बजट में भी कटौती की जा सकती है। इसके असर से लाभार्थी छात्रों की संख्या भी घट सकती है।
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सामान्य तौर पर अक्तूबर माह से छात्रवृत्ति वितरण आरंभ हो जाता है लेकिन, इस दफे दिसंबर माह में भी इसका कोई अता-पता नहीं। समाज कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक विभाग एवं पिछड़ा वर्ग विभाग की ओर से कक्षा नौ-बारह समेत विभिन्न व्यवसायिक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है। इस बार छात्रवृत्ति के लिए नए प्रावधान भी लागू किए जा रहे हैं। इनमें मोबाइल नंबर, आधार नंबर एवं बैंक एकांउट को एक साथ लिंक करना जरूरी कर दिया गया। यह प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हो सकी। वहीं, कोविड-19 के प्रकोप के चलते छात्रवृत्ति से संबंधी दूसरी औपचारिकताएं भी पूरी नहीं हो पा रहीं। इनको देखते हुए छात्रवृत्ति के बजट में कटौती की भी आशंका जताई जा रही।
इससे कम संख्या में ही छात्र लाभ के दायरे में आ सकेंगे। समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछली बार कक्षा नौ एवं दस के लिए 266 विद्यालयों से अनुसूचित जाति के 8225 एवं अनुसूचित जनजाति के 14 छात्रों ने आवेदन किया था, जिसमें सभी को छात्रवृत्ति मिली थी। सामान्य वर्ग के 1900 छात्रों में 1104 छात्रों को ही छात्रवृत्ति दी जा सकी। इसी तरह ग्यारहवीं एवं बारहवीं वर्ग में अनुसूचित जाति के 21999 छात्रों में 20364, अनुसूचित जनजाति के 55 में 40 छात्रों को ही छात्रवृत्ति मिली। सामान्य वर्ग के 10251 छात्रों में महज 7101 छात्रों को ही छात्रवृत्ति दी जा सकी। उम्मीद जताई जा रही इस वर्ष भी करीब 60 हजार छात्रों इन छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करेंगे।
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नए प्रावधानों के चलते छात्रवृत्ति वितरण में विलंब हो रहा है। अभी छात्रों से फार्म भरवाए जा रहे हैं। बजट कटौती के बारे में अभी निश्चित कुछ नहीं कहा जा सकता। सुनील कुमार सिंह, समाज कल्याण अधिकारी
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